संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में निजी विद्यालय संचालक यूपी बोर्ड व सीबीएसई, आईसीएससी बोर्ड के विद्यालय संचालकों के साथ जिलाधिकारी ने बैठक की। उन्होंने कहा कि कक्षा पांच तक किसी भी दशा में फीस, ड्रेस व कोर्स में परिवर्तन नहीं करेंगे। अगर ऐसा किया तो पहली बार में उन पर एक लाख व दूसरी बार गलती करने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कहा कि छात्र-छात्राओं को सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने नियमावली तैयार की है। कुछ निजी विद्यालय मनमाने ढंग से अभिभावकों से फीस वसूल रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने जिला शुल्क नियामक समिति का गठन किया है। शुल्क विनिमय अधिनियम के तहत बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई एवं अन्य परिषदों के कक्षा एक से 12 तक के विद्यालयों पर यह नियम लागू होता है। इसके तहत कोई भी विद्यालय 20 हजार रुपये वार्षिक से अधिक का शुल्क नहीं वसूल सकता है। इसके अलावा परिवहन, बोर्डिंग, मेस, शैक्षिक भ्रमण आदि का शुल्क जो भी लिया जाता है, विद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होना आवश्यक है।
विद्यालय संचालक को प्रत्येक शुल्क की रसीद देनी होगी, जिसमें शुल्क का ब्योरा होगा। उन्होंने बताया कि कोई विद्यालय पांच वर्ष से पहले कोई भी फीस व अन्य चीजों में बदलाव नहीं करेगा। साथ ही बदलाव से पूर्व जिला स्तरीय कमेटी में आवेदन देकर अनुमति लेगा। जिलास्तरीय कमेटी की अनुमति के बाद ही कोई बदलाव किया जाएगा। उन्हाेंने बताया कि शुल्क नियमावली में नियमों का उल्लंघन पर करने पर मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान है। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी सिंह आदि मौजूद रहे।
जरूरी जानकारी वेबसाइट पर करें अपलोड
जिलाधिकारी ने विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों का पूर्ण ब्योरा देने के साथ ही उनके वेतन का भी ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कहा-जिससे यह पता चल सके कि उन्हें न्यूनतम वेतन से कम का भुगतान तो नहीं किया जा रहा है।