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Lalitpur News: फर्जी डॉक्टर दंपती पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई

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ललितपुर। अमेरिका में रह रहे बहनोई की पहचान और मेडिकल दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में करीब तीन साल तक फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में नौकरी करने वाले अभिनव सिंह और उसकी पत्नी लवीना सिंह के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार दोनों ने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता और ननद डॉ. दीपाली गुप्ता के मेडिकल दस्तावेज हासिल कर उनमें कूटरचना की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर चिकित्सक के रूप में नौकरी की।गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के बाद अब पुलिस दोनों की अपराध से अर्जित संपत्ति का ब्योरा जुटाकर आगे की कार्रवाई करेगी। अभिनव सिंह और लवीना सिंह दोनों पहले से जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
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पुलिस के अनुसार अभिनव सिंह ने अमेरिका में रह रहे अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर उनके नाम से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ के पद पर करीब तीन वर्ष तक नौकरी की। दिसंबर 2025 में मामले का खुलासा होने के बाद 10 दिसंबर को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 12 दिसंबर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। टीम ने आईआईटी रुड़की समेत अन्य स्थानों से साक्ष्य जुटाए। नगर पालिका सहित विभिन्न विभागों में डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से प्रस्तुत दस्तावेजों की भी जांच की गई। जांच आगे बढ़ने पर अभिनव की पत्नी लवीना सिंह की भूमिका भी सामने आई।
पुलिस के अनुसार अभिनव की बहन डॉ. दीपाली गुप्ता अमेरिका के फ्लोरिडा में चिकित्सक हैं। अभिनव और उसकी पत्नी लवीना ने डॉ. दीपाली और डॉ. राजीव गुप्ता के मेडिकल दस्तावेज धोखाधड़ी से हासिल किए और उनमें कूटरचना की। इसके बाद लवीना ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मध्य प्रदेश के बीना क्षेत्र में चिकित्सक के रूप में नौकरी की। लवीना की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन एसपी ने 14 मई को 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 21 मई को कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी ने बताया कि अभिनव सिंह और लवीना सिंह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। अब अपराध से अर्जित संपत्ति की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बहन की शिकायत पर खुला था फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़े का खुलासा दिसंबर 2025 में हुआ था। अमेरिका से आईं डॉ. सोनाली सिंह ने जिलाधिकारी और मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान और मेडिकल डिग्री का इस्तेमाल कर उनके भाई अभिनव सिंह मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ बनकर नौकरी कर रहे हैं। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व के नेतृत्व में जांच टीम गठित की थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने अभिनव के खिलाफ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।


कस्टम अधिकारी से फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट बनने तक का सफर

अभिनव सिंह सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे सीपी सिंह का पुत्र है। उसने आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की थी। तीन वर्ष की तैयारी के बाद मुंबई में कस्टम अधिकारी के पद पर तैनात हुआ। 1999 में भ्रष्टाचार के मामले में अभियोग दर्ज होने के बाद वह फरार हो गया था। 2013 में उसने अपने जीजा की डिग्री हासिल कर फर्जी पहचान बनाई। वर्ष 2017 में मथुरा के छाता स्थित केडी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में नौकरी की। 2019 में सीबीआई ने उसे मथुरा से गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेज दिया था। 16 माह जेल में रहने के बाद जुलाई 2020 में वह रिहा हुआ। इसके बाद वर्ष 2022 में एनएचएम के तहत ललितपुर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर नौकरी हासिल की। यहां उसने मरीजों का इलाज करने के साथ ओपीडी और सीसीयू की जिम्मेदारी भी संभाली।

कई संस्थानों में की थी नौकरी
पुलिस के अनुसार अभिनव सिंह ने डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से स्वर्ण जयंती सामुदायिक हॉस्पिटल, मथुरा, शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नलहर, नूंह (मेवात), विवेकानंद केंद्र बीना रिफाइनरी हॉस्पिटल, बीना और केडी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, अकबरपुर-छाता, मथुरा में नौकरी की थी। वहीं, उसकी पत्नी लवीना सिंह ने अपनी ननद डॉ. दीपाली सिंह के नाम से विवेकानंद केंद्र बीना रिफाइनरी हॉस्पिटल, बीना और ब्रज हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर, वृंदावन में चिकित्सक के रूप में काम किया था।
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