बांसी (ललितपुर)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थानीय शाखा में आध्यात्मिक महिला सशक्तिकरण एवं दिव्य अलौकिक समर्पण सम्मान समारोह मनाया गया। इसमें महिला संत को सम्मानित किया गया और आध्यात्म की अलौकिकता एवं संस्कारों का महत्व बताया।
बीके राजयोगिनी चित्ररेखा ने कहा कि नारी परिवार की धुरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है। आदिकाल से नारी पूज्यनीय और वंदनीय रही है। ब्रह्माकुमारी मायारानी ने कहा कि कर्मयोगी जीवन का सच्चा अर्थ यही है कि ईश्वर के प्रति आस्था व समर्पण भाव रखें। परमात्मा सभी के सर्व मानसिक बोझ उठाने के लिए तैयार है, सिर्फ आवश्यकता है समर्पण भाव की। इस अवसर पर बीके प्रीति सहित सभी ने राजयोगिनी मायारानी को समर्पण दिवस की बधाइयां दीं। इस दौरान यहां राजयोग का अभ्यास भी कराया। कार्यक्रम में बीके गीता, बीके रूबी, निशा, बीके पूजा, बीके शिवानी, पूर्व प्रधानाचार्य रामेश्वर प्रसाद गुप्ता,रामस्वरूप साहू आदि उपस्थित रहे। संवाद