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Lalitpur News: डेढ़ माह गुजरा पर नहीं खरीदा जा सका मक्के का एक भी दाना

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जिले में दो क्रय केंद्र हैं संचालित, सौ मीट्रिक टन मक्का खरीद का निर्धारित है लक्ष्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। किसानों को उनकी मक्के की फसल का उचित मूल्य देने के लिए जनपद में दो क्रय केंद्र खोले गए हैं। डेढ़ माह पहले इन्हें खोला गया था लेकिन मक्के के एक भी दाने की खरीद नहीं हो सकी है। इस कारण जनपद में मक्का खरीद शून्य बनी हुई है। जिले के लिए 100 मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में 31 दिसंबर तक निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति करना विभाग के लिए चुनौती साबित होगा।
जनपद में इस वर्ष खरीफ के सीजन में मक्के की बोआई 32,031 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 33,165 हेक्टेयर में की गई थी। कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, इस वर्ष मक्के की फसल का अनुमानित उत्पादन लगभग 3,648.15 मीट्रिक टन होना बताया जा रहा है। पिछले वर्ष 2024-25 में मक्के की बोआई 19,688 हेक्टेयर में की गई थी, जबकि उत्पादन 16,177 मीट्रिक टन हुआ।
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मक्के की सरकारी खरीद के लिए दो क्रय केंद्र ग्राम रोंड़ा और महरौनी में एक अक्तूबर को खोले गए थे। सरकार ने 2400 रुपये प्रति क्विंटल मक्के का सरकारी रेट तय किया है लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को क्रय केंद्रों पर मक्का बेचने के लिए प्रेरित करने में बरती जा रही उदासीनता के चलते खरीद शून्य है। वहीं, विभागीय अधिकारी इसका कारण वेबसाइट न चलने के कारण किसानों का सत्यापन न हो पाना बता रहे है। इन क्रय केंद्रों पर खरीद 31 दिसंबर तक की जानी है।


सत्यापन में आड़े आ रही तकनीकी वजह
कृषि विभाग की ओर से इस बार सैटेलाइट से खेतों का सत्यापन कराया गया है। इसमें जो फसल बोई गई है, वहीं फसल पोर्टल पर फीड की गई है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर जो किसान पंजीकरण करा रहे हैं, उनके खेतों के नंबर पर मक्के की फसल दर्ज न दिखने पर सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। इससे खरीद भी नहीं हो पा रही है।
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वर्जन
जनपद में पिछले दो वर्षों से क्रय केंद्रों पर मक्के की खरीद शून्य रही है। इस बार कुछ किसानों ने पंजीकरण कराया है और नवंबर के अंत तक कुछ खरीद होने की उम्मीद है। पंजीकरण के दौरान मक्के की खरीद के लिए पंजीकरण में तकनीकी कारणों से सत्यापन नहीं हो पा रहे हैं। इससे खरीद पर असर पड़ रहा है। - चामुंडा प्रसाद पांडेय, डिप्टी आरएमओ
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