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तीर्थ आस्था व श्रद्धा के केन्द्र

Mon, 10 Feb 2014 05:43 AM IST
Lalitpur
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ललितपुर। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान तीर्थस्थलों की सुरक्षा के उपाय विषय पर आयोजित संगोष्ठी में आधा सैकड़ा से अधिक विद्वानों ने प्रतिभाग किया। वक्ताओं ने तीर्थों के महत्व व सुरक्षा संबंधी उपायों पर राय प्रस्तुत की।
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गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य व सारस्वताचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के मार्गदर्शन में प्रभावना जनकल्याण परिषद का नैमित्तिक अधिवेशन एवं तीर्थ सुरक्षा के उपाय विषय पर राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पंडित सुरेश मारौरा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि सूबे के सभी तीर्थों को सड़कों से जोड़ा जाए। विद्युत व्यवस्था और पेयजल की समुचित व्यवस्था प्रदेश सरकार उपलब्ध कराये। संयोजक निर्मल शास्त्री ने कहा कि बुंदेलखंड के तीर्थक्षेत्र गिरार, नवागढ़, देवगढ़, सिरोन जी, बालाबेहट, दूधई, पवाजी, मदनपुर, जहाजपुर, टोड़ी, बानपुर, करगुवां जी, कारीटोरन, नैनागिर, द्रोणागिर, पपौराजी, अहार जी आदि आस्था के केंद्र बिंदु हैं। प्राचीन प्रतिमाएं और मंदिर हमें हमारे अतीत के गौरव की याद दिलाते हैं तथा प्रेरणा देते हैं। जनसहभागिता के साथ इनकी सुरक्षा अति आवश्यक है।
इस अवसर पर परिषद महामंत्री डा. सुनील संचय ने कहा कि भारत के सम्पूर्ण सांस्कृतिक वैभव के निर्माण और विकास में संस्कृति और कला का अनुपम योगदान है। हमारे तीर्थ पूजन एवं आस्था के ही केन्द्र नहीं हैं बल्कि स्थापत्य एवं मूर्तिकला, स्वाध्याय, ज्ञान, संयम, साधना के साथ-साथ जीवन जीने की आदर्श शैली सीखने के भी महान केन्द्र हैं। सारस्वत अतिथि डा. महेंद्र मनुज इंदौर ने कहा कि हमें तीर्थक्षेत्रों की मान मर्यादा और पवित्रता बनाये रखनी चाहिए। अखिलेश शास्त्री ने कहा कि बुंदेलखंड का विशाल पुरा वैभव हमारे गौरवमयी इतिहास के दर्शन कराता है। इसकी सुरक्षा आवश्यक है। प्रतिष्ठाचार्य महेश शास्त्री ने कहा कि जीर्णोद्धार के नाम पर पुरा संपदा के अस्तित्व संग खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। अंत में गणाचार्य विरागसागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि तीर्थक्षेत्र हमारी आस्था और श्रद्धा के केंद्र बिन्दु तो हैं ही साथ ही हमारे गौरवमयी अतीत के साक्षी हैं। हमें इनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए अपने कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिए। इसके पूर्व आचार्यश्री से सभी विद्वानों ने आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य महेश जैन, परिषद अध्यक्ष सुरेश, महामंत्री डा. सुनील संचय, संयोजक निर्मल शास्त्री, डा. महेंद्र मनुज, पंडित शीलचंद्र शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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