ललितपुर। क्षय रोग विभाग के दो सेंटर स्टाफ व संसाधन के अभाव में लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों को टीबी की जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। विभागीय अफसर इस संबंध में शासन से पत्राचार कर चुके हैं। लेकिन, दोनों सेंटरों को क्रियाशील बनाने में उदासीनता बरती जा रही है।
क्षय रोग पर नियंत्रण के लिए जिला क्षय रोग विभाग की ओर से डाट्स कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत टीबी से ग्रसित मरीजों की जांच करके उनको उपचार से जोड़ा जाता है। संभावित रोगियों की जांच के लिए जनपद मुख्यालय सहित सभी विकास खंडों में बारह डीएमसी डेजिगनेटिड माइक्रोस्कोपिक सेंटर की स्थापना की गई है। मुख्यालय स्तर पर जिला क्षय रोग अस्पताल, संयुक्त जिला चिकित्सालय में डीएमसी संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखौरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौर्रा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी, मड़ावरा, तालबेहट, बार, बानपुर, पूरा बिरधा एवं गौना में डीएमसी की स्थापना की गई है। पूरा बिरधा व गौना स्थित सेंटर लंबे समय से ठप पड़े हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों को टीबी की जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। विभागीय जानकारों का कहना है कि हर डीएमसी पर प्रतिमाह आधा सैकड़ा से अधिक जांचें की जाती हैं। सुदूर क्षेत्रों में स्थित दोनों डीएमसी में यह सुविधा न मिलने की वजह से मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सत्येंद्र कुमार का कहना है कि पूरा बिरधा व गौना स्थित डीएमसी में लैब टेक्नीशियन व वाइनाकुलर मशीन का अभाव है, इस कारण इन सेंटरों को क्रियाशील नहीं बनाया जा सका है। इस संबंध में शासन से पत्राचार भी किया गया है। लेकिन, अब तक स्टाफ व संसाधन की व्यवस्था नहीं हो पाई है।