ललितपुर। जनपद स्थित 88 हैंडपंपों से निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। कोई हैंडपंप आवश्यकता से अधिक नाइट्रेट उगल रहा है तो किसी हैंडपंप के पानी में आयरन की मात्रा जरूरत से ज्यादा है। कुछ हैंडपंपों के पानी से फ्लोराइड निकल रहा है। इसके लगातार सेवन से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
हैंडपंप लगाने के साथ- साथ जल निगम अधिकारियों को जांच करके यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उससे निकलने वाला पानी पीने लायक है भी कि नहीं। लेकिन, पानी की गुणवत्ता जांचने में विभागीय अधिकारी कोई खास रुचि नहीं दिखाते। आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का दबाव होने पर महज औपचारिकता निभायी जाती है। मौजूदा समय में जनपद के 88 हैंडपंप पानी के साथ खतरनाक रासायनिक तत्व उगल रहे हैं। पानी में टोटल डिजाल्व सालिड (मिट्टी मौरंग) की मात्रा 2,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। ठीक इसी तरह 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नाइट्रेट स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक माना जाता है। पानी में 0.1 से कम व 1.0 से अधिक आयरन भी नुकसानदेह होता है। इसके अलावा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं माना जाता है। जल निगम की जांच के दौरान ब्लाक बार स्थित पुलवारा के एक हैंडपंप के पानी में 144 मिलीग्राम प्रति लीटर नाइट्रेट पाया गया। ठाठखेड़ा में 88 मिलीग्राम नाइट्रेट के साथ 1.2 मिली ग्राम आयरन भी मिला। बस्तगुआं में 72 मिलीग्राम नाइट्रेट पाया गया। जखरा के मजरा गजाधर में लगे हैंडपंप के पानी में 2.0 मिलीग्राम फ्लोराइड मिला। गदयाना में टोटल डिजाल्व सालिड 3,780 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। इस हैंडपंप के पानी में नाइट्रेट भी 640 मिलीग्राम प्रति लीटर मौजूद है। लड़वारी के नीमखेड़ा में एक हैंडपंप से 64 मिलीग्राम नाइट्रेट एक लीटर पानी में घुला हुआ है। कैलगुआं स्थित हैंडपंप के पानी में 85 मिलीग्राम नाइट्रेट के साथ 1.2 मिलीग्राम आयरन की भी मौजूदगी है। बूटी के हैंडपंप के पानी में नाइट्रेट की मात्रा 64 मिली ग्राम है। वहीं डेंगना स्थित एक हैंडपंप के पानी में 2.5 मिलीग्राम प्रति लीटर आयरन निकल रहा है।
महरौनी खंड विकास स्थित बुदनी, लरगन, कुसमाड़ व महरौनी नगर में तीन हैंडपंप खतरनाक ढंग से रासायनिक तत्व उगल रहे हैं। खंड विकास जखौरा स्थित पाचौनी, मसौराखुर्द, अंधियारी, सिरसी, खड़ेरा, बांसी, गनगौरा, मैलार, देवरी, साकिरवाराखुर्द में एक- एक हैंडपंप के अलावा निवाई, महर्रा, थनवारा व रानीपुरा में दो- दो हैंडपंपों के पानी से उक्त रासायनिक तत्व निकल रहा है। मड़ावरा ब्लाक स्थित लखंजर में तीन, पीड़ार में तीन, गौंना में पांच, खुटगुआं में दो के अलावा रामगढ़ा, कारीटोरन, छितरापुर, नीमखेड़ा, परसाटा, पटना, तरावली व झरावटा में एक- एक हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। ठीक इसी तरह बिरधा ब्लाक स्थित बिरधा ग्राम सभा में चार, पिपरिया डोंगरा में दो, तालगांव, खिरिया छतारा, अंडेला, छिल्ला, बेटना, खितवांस, अनौरा, खजूरिया, बरौद आलापुर में एक- एक हैंडपंप का पानी मानकों पर खरा नहीं उतरता है। इसके अलावा तालबेहट ब्लाक स्थित भोपालपुरा में दो, पिपरई, धमकना, हिगौरा, बिगारी, रामपुरा कठवर, टेटा, म्यांव, उदगुआं, चुरावनी, बरीखुर्द, चंदेरा, खांदी, जमालपुर, पुराकलां रसगैयन व पूराकलां चमरौला में एक- एक हैंडपंप का पानी पीने काबिल नहीं है।
सेवन से होती यह दिक्कत
ललितपुर। पानी में नाइट्रेट की अधिकता वयस्कों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन बच्चों के शरीर पर नीले चकत्ते पड़ जाते हैं और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पानी में आयरन की अधिक मात्रा से पथरी हो जाती है। वहीं पानी में फ्लोराइड अधिक होने से हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं। जानकारों का कहना है कि इस तरह के पानी का सेवन करने से बचना चाहिए।
निर्देश के बाद भी नहीं लगाया बोर्ड
ललितपुर। जल निगम की रिपोर्ट में तस्वीर साफ होने के बाद भी उक्त हैंडपंप के पानी के सेवन से ग्रामीणों को रोकने की दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं। जल निगम भले ही दावा करे पर ग्रामीण इलाकों में हैंडपंपों के आसपास ‘पानी पीने योग्य नहीं है’ का बोर्ड तक नहीं लगाया जा सका है।
नहीं सौंपी सदन को सूची
ललितपुर। बीते दिनों जिला पंचायत सदन की बैठक के दौरान खतरनाक मात्रा में रसायन युक्त पानी उगलने वाले हैंडपंपों का मुद्दा छाया रहा था। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बड़ौनिया ने जल निगम अधिकारियों से ऐसे हैंडपंपों की सूची तलब की थी। लेकिन, विभागीय अफसरों ने तैयार सूची सदन के समक्ष प्रस्तुत नहीं की।