ललितपुर। नगर सीमा के अंदर भवनों के नामांतरण में की जा रही लापरवाही का खामियाजा भवनस्वामियों के साथ- साथ नगर पालिका परिषद को भी उठाना पड़ रहा है। ऐसे मामलों में विभाग की बकाएदारी में वृद्धि हो रही है, अधिकारी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। उधर, नामांतरण प्रक्रिया में विलंब के कारण भवनस्वामी को भी जुर्माना अदा करना पड़ता है। मौजूदा समय में चल रहे वसूली अभियान के दौरान लंबित मामलों को चिह्नित करने के निर्देश अफसरों ने जारी किए हैं।
नगर पालिका परिषद में नामांतरण महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। विभाग में भवनों की नामांतरण प्रक्रिया पांच प्रकार से होती है। भवन स्वामी की मृत्यु के पश्चात, भवन की रजिस्ट्री के बाद, रजिस्टर्ड वसीयत के पश्चात, आपसी सहमति या फिर न्यायालय के आदेश पर इसे अंजाम दिया जाता है। भवन स्वामी की मृत्यु के पश्चात तीन सौ रुपये का शुल्क अदा करके उसके उत्तराधिकारी नामांतरण के लिए नगर पालिका परिषद में आवेदन करते हैं। वहीं, रजिस्ट्री के आधार पर एक हजार, रजिस्टर्ड वसीयत पर पांच सौ, आपसी सहमति पर पांच सौ तथा न्यायालय के आदेश के क्रम में भी पांच सौ रुपये शुल्क लिए जाने का प्रावधान है। लेकिन, उक्त सभी स्थितियों में तीन माह के अंदर नामांतरण प्रपत्र नगर पालिका परिषद में जमा करना आवश्यक है। भवन स्वामी की मृत्यु के पश्चात उसके उत्तराधिकारी इस प्रक्रिया में वर्षों लगा देते हैं। इसके पीछे के कारण तो बहुत हैं लेकिन इससे भवनस्वामियों के साथ- साथ नगर पालिका परिषद को नुकसान उठाना पड़ता है। प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने पर उक्त भवन बकाएदारी की श्रेणी में शामिल हो जाता है और विभाग का राजस्व प्रभावित होने लगता है। उधर, नामांतरण की निर्धारित समयसीमा निकल जाने के पश्चात भवनस्वामी पर पच्चीस रुपये प्रतिमाह के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। विलंब से ही सही, नामांतरण प्रक्रिया पूर्ण करवाते समय भवनस्वामियों को भी हजारों रुपये जुर्माना अदा करना पड़ता है। इन स्थितियों से निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों ने चल रहे वसूली अभियान के दौरान ऐसे प्रकरणों पर नजर रखने के निर्देश टीम के सदस्यों को दिए हैं। यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को नामांतरण का महत्व व लाभ बताकर यह प्रक्रिया पूर्ण कराई जाए, जिससे विभाग के राजस्व में वृद्घि हो सके। इससे नामांतरण प्रक्रिया के साथ-साथ राजस्व वसूली में भी तेजी आएगी।