ललितपुर। ऐसा कम ही होता है कि किसी को पदोन्नति मिले और वह उसे ठुकरा दे। लेकिन, बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसा होना आम बात है। इस बार भी यही हुआ। मई माह में 138 वरिष्ठ शिक्षकों को प्रमोशन दिया गया पर इनमें से 67 शिक्षकों ने इसे स्वीकार किया। शेष 71 शिक्षकों ने विभाग से मिली पदोन्नति ठुकरा दी। माना जा रहा है कि किसी को मनचाहा स्थल नहीं मिला तो किसी ने स्कूल की जिम्मेवारी आने पहले से ही हाथ खडे़ कर दिए।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाती है, पर अक्सर अनेक शिक्षक इसे ठुकरा देते हैं। वजह साफ है कि वह अपने घर से दूर की पोस्टिंग नहीं चाहते। तो वहीं कईयों को स्कूल की हेडमास्टरी भी पसंद नहीं आती। कई शिक्षकों का मानना है कि प्रधानाध्यापक का पद चुनौतीपूर्ण हैं। इस पर मिड डे मील से लेकर शिक्षण आदि के निर्वहन का जिम्मा होता है। इसके अतिरिक्त उसे तमाम सूचनाएं भी एकत्र करनी होती हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में प्राथमिक विद्यालय के 95 प्रधानाध्यापक व 43 सहायक शिक्षकों को मई माह में पदोन्नति दी गई थी। जिन शिक्षकों को उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक बनने का मौका मिला और उनके पदोन्नत स्थल भी आसपास थे, उनमें से अधिकांश ने कार्यभार ग्रहण कर लिया। वहीं, प्राथमिक विद्यालय या फिर उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर जिन शिक्षकों की पदोन्नति हुई और स्थल दूरदराज इलाके में थे, उनमें से अधिकतर ने पदोन्नति ठुकरा दी। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने पदोन्नति ठुकराने के प्रचलन को रोकने के उद्देश्य से नियम को कड़ा कर दिया है। अब पदोन्नति ठुकराने वाले शिक्षकों को तीन साल बाद ही दोबारा मौका मिल सकेगा।