ललितपुर। मुनिपुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म अग्नि के समान है, जो गलत करेगा वह जल जाएगा, चाहे वह मुनि हो या श्रावक।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में बारह व्रतों को अंगीकार करने वाला श्रेष्ठ हो जाता है। इतना श्रेष्ठ हो जाता है कि चक्रवर्ती भी पहले उन्हें भोजन कराते हैं और फिर बाद में खुद भोजन करते हैं। इसलिए जिन्होंने जैन कुल में जन्म लिया है, उन्हें इन बारह व्रतों को करना चाहिए। जैन दर्शन में व्रतों के आचरण का विशेष महत्व है। बारह व्रतों का पालन करने वाला ही संयमी है। बारह व्रत लेने से गृहस्थी बिगड़ती नहीं सुधरती है। भविष्य की चिंता उन्हीं को होती है, जिनका वर्तमान बिगड़ा हुआ होता है। भक्त भीख मांगकर तो खा लेगा लेकिन, मंदिर की संपत्ति नहीं लेगा, जिन्होंने मंदिर की संपत्ति ली है, वह पारे के समान कूट-कूट कर निकल जाएगी। मुनि महाराज ने कहा कि एक बार एक व्यक्ति आचार्यश्री के पास अपना भविष्य पूछने पहुंचा, तब आचार्यश्री ने कहा कि वह तो अपना वर्तमान देखते हैं भविष्य नहीं। सच्चा गुरू अपने भक्तों का भविष्य नहीं बल्कि वर्तमान सुधारता है। सच्चा शिष्य भी वही है जो अपना भविष्य न पूछे। इस मौके पर सकल दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजन, प्रबुद्ध नागरिक व श्रृद्धालु मौजूद रहे।
अद्वितीय रक्षा विधान आज
ललितपुर। जनपद के इतिहास में पहली बार अद्वितीय रक्षा बंधन विधान का भव्य आयोजन दो अगस्त को मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया पीयूष के निर्देशन में अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल जी मंदिर प्रांगण में होगा।
इस विधान में लगभग एक लाख श्रीफलों के अर्ग चढ़ाए जाएंगे। यह प्रक्रिया सुबह साढ़े छह बजे शुरू होगी। अटा मंदिर एवं बहुबलि नगर मंदिर से बसों की नि:शुल्क व्यवस्था रहेगी।