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घाटे का सौदा साबित हो रही किसानी

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घाटे का सौदा साबित हो रही किसानी
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ललितपुर। मौसम के करवट लेते ही रबी फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। समय से पहले ही तेज धूप से मसूर उकसा रोग की चपेट में आ गया है। कृषि वैज्ञानिकों के पास भी इसका कोई उपचार न होने से किसान चिंतित हैं, वहीं इस रोग की चपेट में चना की फसलें भी हैं।
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4-5 वर्षों से सूखे की विभीषिका झेल रहे किसानों को इस बार अच्छी वर्षा होने से उपज बढ़ने की उम्मीद दिखी थी, लेकिन मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तहसील क्षेत्र मड़ावरा के समीपवर्ती ग्राम सोंरई के किसानों द्वारा बताया गया कि उन्होंने लाखों रुपये की लागत लगाकर फसल रोपी, जिनमें अधिकांश किसान मसूर, चना और मटर की रोपाई किये हुए थे। उन्नत किस्म के बीज और खाद साथ में मंहगी जुताई-बुवाई, पलेवा और सिंचाई ने किसान की बखली उधेड़ दी। कई किसानों ने तो बैंक और व्यापारियों से उधार कर्जा तक ले रखा है। शुरुआती दौर में तो किसानी ठीकठाक रही लेकिन जैसे ही फसल तैयार होने का बक्त आया तो मौसम की मार पड़ना चालू हो गया। बताया गया कि पहले शीत लहर के प्रकोप से भी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा और रही-सही कसर बेमौसमी बरसात ने पूरी कर दी। वर्तमान में उकसा रोग शेष बची चना, और मसूर की फसलों पर अपना सितम ढाए जा रहा है। इससे बचाव के लिए किसान तमाम उपाय खोज रहा है और कई किसान तो कृषि वैज्ञानिकों के पास भी सलाह लेने पहुंचे, लेकिन बचाव की कोई संभावना प्रतीत न हुई। ऐसी स्थिति में खेतिहर किसान बड़े ही चिंतित हैं और शासन से मदद की आस लगाए हैं।
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तीन एकड़ में मसूर की फसल बोई थी, इस बर्ष बेहतर फसल उपज की आस थी। लेकिन बेमौसमी बारिश और तुषार के प्रकोप ने तैयार हो रही फसल चौपट कर दी।
- दयाराम मिश्रा, किसान- सोंरई

रोग लगने से फसलें सूखती जा रहीं हैं। लागत निकल पाना भी मुश्किल है, ऐसे में प्रशासन को फसलों में हुये नुकशान की जांच करवानी चाहिये।
- बल्लू कुशवाहा, किसान- सोंरई
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