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एसएसी एसटी एक्ट के विरोध में सवर्णों के बंद का दिखा व्यापक असर

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भारत बंद का रहा व्यापक असर
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करीब बीस करोड़ का व्यापार प्रभावित होने की संभावना
संगठनों सहित व्यापारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से किया बंद का समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सवर्णों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का बृहस्पतिवार को जनपद में व्यापक असर देखने को मिला। हालांकि, यहां व्यापारियों व विभिन्न संगठनों द्वारा शांतिपूूर्ण ढंग से बंद का समर्थन किया, इसमें करीब 80 फीसदी बाजार बंद रहा। इससे व्यापारिक जानकारों के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार भी प्रभावित हुआ। सवर्णों को दलित उत्पीड़न के झूठे मुकदमों में फंसाने वाले काले कानून का विरोध करते हुए व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर सरकार को अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया।
बृहस्पतिवार को जनपद में विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा एससीएसटी एक्ट कानून का विरोध करने के लिए बाजार बंद रखा। शहरी क्षेत्र में जहां दोपहर तक अधिकांश व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं तो वहीं व्यापारिक संगठनों व अन्य संगठनों ने अपने-अपने शांतिपूर्ण तरीके से एससीएसटी एक्ट का विरोध किया। सुबह से ही व्यापारियों ने व्यापारिक संगठनों के बंद के आह्वान पर बाजार को बंद रखा, हालांकि एससीएसटी एक्ट का समर्थन करने वाले भी बहुत से लोग दिखे और उन्होंने अपना व्यापार खुला रखा। दोपहर दो बजे तक 80 फीसदी बाजार बंद रहा। बृहस्पतिवार को शहर के मुख्य बाजार, सोने-चांदी का व्यापार, कटरा बाजार, साड़ी मार्केट, मुख्य घंटाघर बाजार, सावरकर चौक स्थित बाजार, गल्ला मंडी समेत मुख्य बाजार व्यापारियों द्वारा बंद रखे गए। गल्ला मंडी बंद होने के कारण सीजन नहीं होने के बाद भी करीब डेढ़ से दो करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ, जबकि सोने, चांदी के मार्केट व अन्य मार्केट से शहर में बृहस्पतिवार को 16 से 18 करोड़ का व्यापार प्रभावित होना बताया गया है। संगठनों द्वारा बाजार बंद का समर्थन करते उक्त एक्ट में संशोधन में बदलाव की मांग करते हुए डीएम को ज्ञापन भी सौंपे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंद का खासा असर देखा गया और कस्बा क्षेत्रों में व्यापारियों ने बाजार दिन भर बंद रखा। व्यापारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन डीएम को देकर अपना विरोध जताया। ज्ञापन में बताया गया कि अनुसूचित जाति/जनजाति एक्ट 2018 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रावधानों के विरोध में भारत बंद एवं एससीएसटी एक्ट में पूर्ववर्तीव्यवस्था लागू किए जाने व उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देश के आलोक में जांच करने के उपरांत ही कार्यवाही कराए जाने के संबंध में अनुरोध किया। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम में व्यापक संशोधन करते हुए अधिनियम के अंतर्गत शिकायत किए जाने पर बिना जांच किए गिरफ्तारी के प्रावधान किए गए हैं। जिनका संपूर्ण देश में आमजनमानस के द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है। जिन राज्यों में अग्रिम जमानतके प्रावधान राज्यों द्वारा किए गए हैं उन राज्यों में भी उपरोक्त अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत नहीं ली जा सकती है। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में यह व्यवस्था की थी कि किसी भी दलित समाज के व्यक्ति द्वारा शिकायत किए जाने पर प्रभारी निरीक्षक या क्षेत्राधिकारी द्वारा जांच की जाती थी, अब केंद्र सरकार के संसोधन करके बिना जांच किए लोगों जेल भेजने की व्यवस्था कर रही है, जो गलत है और मानवीय मूल्यों के विरुद्घ है। उपरोक्त वर्ग का इस्तेमाल करके लोगों के विरुद्घ फर्जी शिकायतें कर बराबर उत्पीड़न कराया जा रहा है। उपरोक्त संशोधन से देश में आम लोगों का आत्माधि क उत्पीड़न होगा और उन्हें बिना कारण जेल भेजा जाएगा। जिससे आम जनमानस का उत्पीड़न होगा, अपमानित होगा और जेल के सीखचों के पीछे होगा। व्यापारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर उक्त 2018 में किया गया संशोधन अविलंब वापस किए जाने की मांग की है। ज्ञापन पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय वरिष्ठ उ पाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर, प्रदीप त्रिपाठी, नरेंद्र कड़ंकी, महेश सतभैया, संतोष चौधरी, रवि चुनगी, अज्जू बाबा, मनोज जैन, मज्जू सोनी, राहुल मोदी, जयेश सराफ, अखिलेश कुमार टड़ैया, अभय जैन, धर्मेंद्र कुमार, नवनीत किलेदार, वैभव जैन, उदय चंद्र सराफ सुरेश, पंकज जैन, डा.एसपी पाठक, प्रदीप सतरवांस आदि के हस्ताक्षर हैं। तालबेहट व नाराहट में भी बाजार बदल रहा।
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एससीएसटी एक्ट के विरोध में रहा नाराहट बंद
ङोगराखुर्द (ललितपुर)। उद्योग व्यापार मंडल द्वारा बाजार पूर्णता बंद करते हुए केंद्र सरकार के एससीएसटी एक्ट में संशोधन का विरोध जताया। व्यापारी संगठन के अनुसार सरकार द्वारा चलाए गए इस कानून के विरोध में एससीएसटी कानून में सुधार करना आवश्यक है। वक्ताओं ने विरोध जताते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि बाबा साहब अंबेडकर ने कानून बनाकर समानता का अधिकार दिया था और उच्चतम न्यायालय ने भी इसके दृष्टिगत रखते हुए दलित उत्पीड़न की स्थिति की जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे, लेकिन वोटों की राजनीति के चलते केंद्र सरकार यह कानून लेकर आई है, जिसके विरोध में व्यापारी समाज, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, सामान्य वर्ग एवं उधोग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को एससी एसटी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। साथ व्यापारियों द्वारा बाजार बंद कर केंद्र सरकार के खिलाफ काफी देर तक नारेबाजी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए एक्ट में संशोधन कर लागू करने की निंदा भी की। वक्ताओं ने कहा कि काला कानून वापिस लो। नाराहट बाजार में साप्ताहिक हाट बाजार लगने बाद भी नहीं खुला। बाजार बंद का नगर में व्यापक असर दिखाई दिया। हालांकि दोपहर बाद कुछ व्यापारियों ने अपनी दुकानें प्रतिष्ठान खोल लिए थे। कस्बा नाराहट में दोपहर तक चाय पान की दुकानें तक नहीं खुलीं। नाराहट में बृहस्पतिवार को हाट बाजार लगता है इसके बाद भी व्यापारियों ने मार्केट बंद कर नारेबाजी की सरकार की नीतियों का विरोध किया। बैठक में सर्वेश खरे, नीतेश राठोर, शैलेश शर्मा, हारून खान, कपिल गुप्ता, सोरभ गुप्ता, सोनू सोनी, क्रश कुशवाहा, राहुल जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
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- अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की एक बैठक जिला कार्यालय पर आयोजित की गई, जिसमें भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम में संशोधन करने पर घोर निंदा की गई। जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि संसद द्वारा पारित एससीएसटी एक्ट में गैर एससी एसटी नागरिक अपने आपको स्वयं बंधक के रुप में देख रहे हैं। वर्तमान में एससी एसटी के नागरिक अन्य नागरिकों के विरुद्घ झूठा मुकदमा दर्ज कर दें तो वह जेल में बंद कर दिया जाएगा। इसमें बिना जांच के जमानत का भी प्रावधान नहीं रखा गया है, जो घोर निंदनीय है। भूपेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो व्यवस्था की गई थी कि पहले मुकदमे की जांच की जाए, इसके बाद कार्यवाही हो, यदि कोई निर्दोष हो तो उसे परेशान न किया जाए। उक्त आदेश सही था, लेकिन कुछ नेताओं ने अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए एससी एसटी अधिनियम में संसद द्वारा नवीन अध्याधेश लाया गया, जो गलत है। इस मौके पर हरपाल सिंह चंदेल, बॉबी राजा, भगवत सिंह वैस, विजय विक्रम सिंह, राघवेंद्र सिंह सिसौदिया, सुरेंद्र सिंह बुंदेला, राजेंद्र सिंह, शैलेंद्र राजा बुंदेला, अखंड प्रताप सिंह, जंडेल सिंह, हरवन सिंह, शिवेंद्र सिंह परमार, सतेंद्र सिंह बुुंदेला, अजय प्रताप सिंह, नाती राजा, शिवादित्य प्रताप सिंह, आकाश चौहान, छोटू राजा आदि उपस्थित रहे।
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