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जिले के कई गांवों में नहीं चल रहे मनरेगा के काम

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कई गांवों में मनरेगा के काम ठप
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ललितपुर। जिले में रबी सीजन की फसल कटाई व थ्रेसिंग का काम पूरा होते ही श्रमिकों के सामने एक बार फिर रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में मनरेगा भी धोखा देती नजर आ रही है। जिले के कई गांवों में मनरेगा के तहत होने वाले काम बंद पड़े है। इस कारण रोजगार के लिए सहरिया जाति के मजदूरों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। हालांकि, मुख्य विकास अधिकारी ने सभी बीडीओ को प्रत्येक ग्राम में काम लगाने के निर्देश दिए है।
गांवों से पलायन रोकने के उद्देश्य से तत्कालीन यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शुरू की थी। इसमें मजदूर को ग्राम पंचायत में ही सौ दिन के रोजगार की गारंटी प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत जिले में एक लाख तिरेसठ हजार जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें से अधिकांश श्रमिक बीते माह तक कृषि कार्यों में व्यस्त बने रहे। अब, जब फसल कटाई, थ्रेसिंग जैसे कार्य पूरे हो गए है तो श्रमिकों के लिए घर पर बैठने की स्थिति बन गई है। कई गांवों में रोजगार की मांग बढ़ गई है। इसके बाद भी जिले के 32 गांवों में मनरेगा के तहत रोजगार का सृजन अब तक नहीं किया गया है, ऐसे में गांवों में काम पूरी तरह ठप है। जिससे कई गांवों के श्रमिकों को काम की तलाश में जिले से पलायन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। विशेषकर सहरिया जाति के महिला-पुरुषों ने मध्य प्रदेश के इंदौर, गुजरात के अहमदाबाद व दिल्ली की ओर रुख कर लिया है।
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हालांकि, शासन ने इससे निपटने के लिए मनरेगा में मई माह के दौरान छह लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित करने का लक्ष्य दिया है, जिसके मुकाबले श्रमिकों को तीन लाख मानव दिवस का रोजगार प्रदान किया गया है। शेष लक्ष्य पाने के लिए रोजगार का सृजन अब तक नहीं किया जा सका है। इससे लक्ष्य पिछड़ता दिखाई दे रहा है। इससे विभागीय अफसर हरकत में आ गए हैं। गत दिवस मुख्य विकास अधिकारी वीपी पांडेय ने सभी खंड विकास अधिकारियों की बैठक कर उन्होंने प्रत्येक ग्राम में तत्काल काम शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।

ये चल रहे काम
मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास निर्माण, नाले को गहरा करना और गड्ढे खोदने का काम चल रहा है।


प्रत्येक गांव में मनरेगा के अंतर्गत तुरंत काम शुरू कराया जाएगा, जिससे श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिल सके।
- वीपी पांडेय
मुख्य विकास अधिकारी
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