गुलजार हुए राखी के बाजार, चीनी राखी से बच रहे दुकानदार
ललितपुर।
सोमवार को रक्षाबंधन का मुहूूर्त भले ही मात्र पौने तीन घंटे का हो, लेकिन बहन-भाई के इस पर्व ने बाजार गुलजार कर दिए हैं। शहर में खासकर घंटाकर और कटरा बाजार में दर्जनों राखियों की आकर्षक दुकानें सजाई गई हैं। बच्चों को कार्टून और टेडी राखी की खूब मांग है। वहीं, दुकानदार इस बार चीनी राखी से बचते ही नजर आए।
भाई-बहन का पर्व रक्षाबंधन सोमवार को सुबह 10.42 बजे से दोपहर 1.30 बजे मनाया जाना है। इसका कारण सोमवार को सुबह 10.42 बजे तक भद्रा नक्षत्र है और भद्रा में रक्षाबंधन और होलिका दहन नहीं होता है। वहीं इसी दिन रात्रि में चंद्रग्रहण होने के कारण नौ घंटे पूर्व यानी 1.30 बजे से सूतक लग रहे हैं। ऐसे में सूतक काल में भी रक्षाबंधन या कोई शुभ कार्य नहीं होने की मान्यता है। इस प्रकार रक्षाबंधन पर्व सुबह 10.42 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक यानि 2.48 घंटे ही मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर्व सोमवार को भले ही मात्र पौने तीन घंटे का हो, लेकिन बहिनों द्वारा काफी पहले से ही रक्षाबंधन की तैयारियां की जा रही हैं और बाजारों में राखी के साथ ही अन्य प्रकार के भाईयों की पसंदीदा वस्तुओं को खरीदारी की जा रही है। इसी के चलते बाजार भी इस बार खूब सजाए गए हैं। घंटाघर तक बीच सड़क पर मध्य में कतार लगाकर दर्जनों दुकानें सजाई गई हैं। वहीं सड़क किनारे अन्य सामानों के विक्रेताओं द्वारा भी लाभ कमाने के उद्देश्य से दुकान के सामने आकर्षक राखी की दुकानें सजाई गई हैं। दुकानों पर कार्टून और टेडीबियर वाली राखी 15 से लेकर 25 रुपये तक की बिक रही हैं, तो वहीं सादा धागा वाली राखियां पांच से लेकर 20 रुपये तक की बिक रही हैं। वहीं, नगयुक्त धागा वाली राखियां 10 से लेकर 30 रुपये तक बिक रही हैं, जो बहनों को खूब भा रही हैं। बच्चों में पसंदीदा राखियां खरीदनों को लेकर काफी उत्साह है। वहीं, चीनी राखियों पर इस बार भारत-चीन केे बीच बढ़ते तनाव का असर भी देखने को मिल रहा है। लोग दुकानों पर जाकर सबसे पहले यह पूछते जरूर देखे जा रहे हैं कि चीनी राखी तो नहीं है। इस पर इस बार दुकानदार चीनी धागे वाली राखियां से परहेज करते देखे गए हैं।
बेसन 70 किलो, लड्डू 80 रुपये
ललितपुर। शहर में रक्षाबंधन पर्व के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में मिठाई के रुपए बेसन और बूंदी के लड्डुओं की विशेष मांग रहती है। जिसके चलते खुली दुकानों पर वेसन और बूंदी के लड्डुओं की भी दुकानें सजाई गई हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि जहां बेसन 70 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं लड्डू 80 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। जबकि काफी मात्रा में लड्डू बनाने में जहां घी, चीनी और ऊर्जा खर्च होती है, जिसके चलते बने हुए लड्डुओं और बेसन के रेट में बहुत अधिक अंतर भी नहीं है। ऐसा ही हाल मावा और मिठाई में भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में मिष्ठान की क्वालिटी के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
पढ़ाई के समय व्यापार कर रहे नौनिहाल
ललितपुर। रक्षाबंधन या फिर अन्य कोई त्योहार हो, इन पर अधिकांशत: बाजारों में बच्चे भी उस त्योहार के अनुसार सामानों की बिक्री करते देखे जा सकते हैं। रक्षाबंधन से पूर्व भी बच्चे बाजारों में राखियों की छोटी दुकानें सजाए हुए हैं, जबकि यह समय बच्चों की पढ़ाई का है। लेकिन यह बच्चे पढ़ाई छोड़कर कमाई में लगे हुए हैं। जबकि इन्हें इस काम में बहुत ज्यादा कमाई भी नहीं होती है। लेकिन बच्चों को देखकर बहुत से लोग इनसे कुछ राखियां भी खरीद ले रहे हैं। लेकिन यह संख्या काफी कम ही होती है।