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जिले में औसत से कम बारिश होने से बुवाई प्रभावित

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कम बारिश से खरीफ की बुवाई प्रभावित
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पिछले चार साल से नहीं हुई पर्याप्त बारिश
लगातार घाटे से कर्ज में दब रहा किसान
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जुलाई के महीने में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे सूखे के हालात बन गए हैं। इसका विपरीत असर खरीफ की बुवाई पर पड़ा है। अब तक जिले में 70 प्रतिशत ही फसल की बुवाई हो पाई है। पछले चार सालों से जिले में औसत से कम बारिश हो रही है, जिससे जिले के किसान उबर नहीं पा रहे हैं, उन्हें फसल में लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। अधिकांश किसान कर्ज में आ गए हैं।
इस मानसून सीजन में अच्छी बारिश की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इस बार मानसून ने धोखा दे दिया है। यहां औसत से काफी कम बारिश हुई है। इसका विपरीत असर खरीफ फसल की बुवाई पर देेेखा जा रहा है। अब तक जिले में 70 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है। इसमें धान की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। किसानों ने उड़द फसल की बुवाई में अधिक रुचि दिखाई है, जिससे इसकी बुवाई का प्रतिशत 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जिन किसानों ने बुवाई कर दी है, उन्हें अब फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। जिले के अंदर सबसे कम बार क्षेत्र में बारिश हुई है। इससे यहां फसल सूखने लगी है। गत सीजन में भी इस क्षेत्र को शासन ने सूखाग्रस्त माना है। जानकारों का कहना है कि बारिश का यही हाल रहा तो समूचा जिला एक बार फिर सूखे की चपेट में आ जाएगा। तहसीलदार गुलाब सिंह ने बताया कि महरौनी क्षेत्र में जून व जुलाई माह में अभी तक 91 मिलीमीटर बारिश हुई है।
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दो लाख छिहत्तर हजार में बुवाई का लक्ष्य
जिले में खरीफ सीजन में दो लाख छियहत्तर हजार पांच सौ निन्नावे हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें धान 1500, मक्का 28800, ज्वार 500, उड़द 201234, मूंग 8000, अरहर 1000, सोयाबीन 15365, तिल 1000, मूंगफली 1000 हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई होनी है। इसके मुकाबले उड़द की बुवाई 75 प्रतिशत हुई है जबकि धान की फसल पचास प्रतिशत से कम बोई गई है। अन्य फसलों का प्रतिशत 70 के आसपास रहा है।
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इन वर्षो में हुई इतनी वर्षा
वर्ष 2013 में औसत से ज्यादा 1556 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वहीं, वर्ष 2014 में 645 मिलीमीटर, वर्ष 2015 में 313 मिलीमीटर, वर्ष 2016 में 799 मिलीमीटर, वर्ष 2017 में 576 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
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फोटो 25
कैप्सन- अरविंद तिवारी
बारिश की कमी के चलते फसल सूखने लगी हैं साथ ही जो फसल मिट्टी से ऊपर आ गई है, उन्हें जानवरों से बचाना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र में नील गाय और आवारा पशु फसलों को रौंद रहे हैं। इस कारण फसल को बचाना मुश्किल है। क्षेत्र में दोबारा बुवाई करने के आसार बनते नजर आ रहे हैं जो चिन्ता का विषय है ।
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अरविन्द तिवारी
पचौडा
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फोटो 26
कैप्सन- इमरत विश्वकर्मा
सोयाबीन की सूख रही फसल
पहली बारिश में ही उड़द, मूंग व सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन उसके बाद से बारिश नहीं हो रही है, जिससे फसल सूूख गई है। इससे परेशानी बढ़ गई है। लगता है कि दोबारा बुवाई करना पड़ेगी।
इमरत विश्वकर्मा
कुआघोषी
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