छात्रों की संख्या पता नहीं तो कैसे बंटेगी यूनिफार्म
- बीएसए कार्यालय के पास नहीं है मौजूदा सत्र की संख्या का आंकड़ा
- ड्रेस बांटने के लिए आई 3 करोड़ 32 लाख की पहली किश्त
- 15 जुलाई से पहले सभी बच्चों तक पहुंचाई जानी है ड्रेस
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नि:शुल्क यूनिफार्म वितरित कराने के लिए एक महीने पहले ही राज्य सरकार व केंद्र सरकार दोनों ने ही अपने-अपने मद की तीन करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जिला बेसिक शिक्षा विभाग को उपलब्ध करा दी है, लेकिन बीएसए कार्यालय के पास जनपद में इस सत्र के छात्रों की संख्या का स्पष्ट आंकड़ा तक उपलब्ध नहीं है। जबकि शासन ने ड्रेस बांटने के लिए 15 जुलाई तक का समय निर्धारित किया है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे में जिले के सभी विद्यार्थियों तक यूनिफार्म आखिर कैसे पहुंच पाएंगी।
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले नान बीपीएल छात्रों (गरीबी रेखा से ऊपर) को छोड़कर सभी बालक-बालिकाओं को भारत सरकार द्वारा संचालित सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर वर्ष मुफ्त में दो-दो सेट यूनिफार्म उपलब्ध कराई जाती है। इस सत्र में यूनिफार्म वितरित कराने के लिए हाल ही में विगत 9 मई को सर्व शिक्षा अभियान के तहत जनपद को पहली किश्त के रुप में कुल धनराशि 3 करोड़ 10 लाख 38 हजार 200 रुपए उपलब्ध कराए गए हैं। यह धनराशि पिछले वर्ष के छात्राें की संख्या के हिसाब से भेजी गई है। इसमें से परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले 1, 53, 391 छात्राें के मुकाबले 3. 7 करोड़ रुपये और कस्तूरबा विद्यालयों में पढ़ने वाली समस्त 600 छात्राओं की यूनिफार्म के लिए 2.40 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। गौरतलब है कि जनपद के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नान बीपीएल बालकों की यूनिफार्म के लिए राज्य सरकार डेढ़ माह पहले 10 अप्रैल को 21.94 लाख रुपये उपलब्ध करा चुकी है। शासन के निर्देश हैं कि ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद 15 जुलाई से पहले सभी बच्चों को यूनिफार्म के दो-दो सेट वितरित कर 15 जुलाई तक उपभोग प्रमाण प्रदेश मुख्यालय में उपलब्ध करा दिया जाए। धनराशि मिले काफी समय बीत गया है, लेकिन जिला बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक यूनिफार्म वितरण के लिए अभी तक विद्यालय प्रबंध समितियों के बैंक खातों में धनराशि नहीं भेजी गई है। एसएमसी के खातों में धनराशि नहीं भेजे जाने के पीछे की बड़ी वजह भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही ही है। विभाग के पास अभी जनपद के परिषदीय विद्यालयों के वास्तविक छात्राें का आंकड़ा तक नहीं है। बिना संख्या जाने किस हिसाब से खातों में धनराशि भेजी जाए यह भी एक समस्या का विषय है।
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विद्यार्थियों का वास्तविक आंकड़ा पता नहीं
जिला बेसिक शिक्षा विभाग के पास जनपद में चल रहे परिषदीय विद्यालयों के छात्रों की संख्या का वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जो जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का एक बड़ा उदाहरण है। पिछली 19 मई से सभी परिषदीय विद्यालयों के ग्रीष्म कालीन अवकाश शुरू हो गए हैं। स्कूल बंद होने से पहले सभी विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान चलाकर बच्चों के नामांकन किए गए, लेकिन स्कूलों द्वारा यह सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है कि उनके विद्यालय में कितने बच्चों के छात्रों की संख्या है और अंतिम दिनों तक छात्रों की कितनी संख्या थी। इससे यह भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि विगत दिनों चलाए गए स्कूल अभियान का कितना असर हुआ है। इस वर्ष छात्रों की संख्या बढ़ी या फिर विगत वर्ष के सापेक्ष कम हुआ है। इसका कुछ पता नहीं है। इससे संकुल प्रभारियों व खंड शिक्षा अधिकारियों की अपने जिम्मेदारियों के प्रति गंभीरता का भी पता चलता है।
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मांगी गई छात्रों को संख्या
बीते सोमवार को समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सभी को निर्देश दिए गए हैं वह अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों के छात्राें की संख्या उपलब्ध कराएं, जिससे एसएमसी के खातों में यूनिफार्म की धनराशि भेजी जा सके।
- अशोक सिंह यादव
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।