चुनावी मुद्दा बनकर रह गया सुम्मेरा तालाब
ललितपुर। शहर के सौंदर्य और हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक सुम्मेरा तालाब नगर पालिका चुनावों के लिए केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। बीते कई वर्षों से नगर पालिका अध्यक्ष पद पर लड़ रहे प्रत्याशी सुम्मेरा तालाब के जीर्णोद्घार को अपने चुनाव के घोषणा एजेंडा में उठाते आ रहे हैं। वर्तमान में लगभग समस्त प्रत्याशियों ने चुनावी घोषणा में सुम्मेरा तालाब के जीर्णोंद्घार व सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े वादे किए हैं।
शहर की आबादी क्षेत्र के बीचो-बीच यह तालाब स्थित है, इसके आलावा शहर में कहीं पर भी मनोरंजन व शांतिपूर्ण वातावरण के लिए कोई अन्य जगह नही हैं। इसलिए यह हमेशा से ही शहर के सौंदर्य का प्रतीक रहा है। इसके अलावा इस तालाब के बंध पर हिंदू धर्म के विभिन्न भगवानों के मंदिर व शिवालय स्थापित हैं। इसलिए सुम्मेरा तालाब हिंदू धर्म से जुड़े डेढ़ लाख से अधिक लोगों की आस्था का प्रतीक भी है। इस तरह यह तालाब शहर के साथ समस्त दो लाख शहरवासियों के दिल में खास जगह रखता है। नियमित रखरखाव व सफाई के अभाव के चलते बीते कुछ वर्षों से सुम्मेरा तालाब अपना अस्तित्व खोने की कगार पर आ गया है। नगर पालिका के लगभग चार पंच वर्षीय चुनावों के कार्यकाल से यह तालाब अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। हर चुनाव में तालाब के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्घार के नाम पर प्रत्याशी शहर वासियों के बड़े-बड़े वादे करते आ रहे हैं, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले चुनाव में फिर यह मुद्दा बनकर सामने आ जाता है। ऐसा नहीं है कि पूर्व में तालाब के जीर्णोद्धार के नाम पर रुपये खर्च नहीं किए गए हैं। पूर्व अध्यक्ष रमेश खटीक के कार्यकाल में सुम्मेरा तालाब की सफाई का अभियान काफी बड़े स्तर पर चलाया गया था और करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद सुभाष जायसवाल के कार्यकाल में तालाब की साफ-सफाई पर लाखों रुपये खर्च हुए और लगभग चार करोड़ की लागत से पर्यटन विभाग ने भी तालाब के जीर्णोद्घार का काम किया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तालाब का सौंदर्यीकरण इस बार भी समस्त प्रत्याशियों के की चुनावी घोषणा व चुनावी मुद्दों में पहले नंबर है। अब तो आमलोगों को ऐसा लगने लगा है कि तालाब का जीर्णोद्घार व सौंदर्यीकरण कभी नहीं होना है, अब हमेशा ही यह नेताओं व जनप्रतिनिधियों के लिए चुनावी मुद्दा बनकर रहेगा।