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--बुंदेलखंड के जर्रे-जर्रे में प्राचीन विरासतों के अंश मौजूद

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बुंदेलखंड के जर्रे-जर्रे में प्राचीन विरासतों के अंश मौजूद
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ललितपुर। राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि बुंदेलखंड के जर्रे-जर्रे में प्राचीन विरासतों के अंश मौजूद हैं। इस माटी की शूरवीरता का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां का इतिहास और संस्कृति किसी परिचय की मोहताज नहीं है। जरूरत है सिर्फ इसे समुचित तरीके से संजोकर वैश्विक पटल पर दर्शाने की है। सम्राट अशोक जैसे ऐतिहासिक पुरुष ग्राम गुजर्रा में और उसके बाद ललितपुर में कई बार आकर रुके। गोस्वामी तुलसीदास ने 77 वर्ष की उम्र में चित्रकूट में रामचरित मानस की रचना की और उन्होंने 120 वर्ष की आयु प्राप्त की। बुंदेलखंड की नयी पीढ़ी अपनी प्राचीन विरासत को पहचाने, वरना यह विरासत विलुप्त हो जाएगी। राजकीय इंटर कालेजट में इन्टैक ललितपुर चैप्टर द्वारा आयोजित एक दिवसीय हेरीटेज सिटीजन वर्कशॉप में वे बोल रहे थे।
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जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि इन्टैक ललितपुर चैप्टर अपनी धरोहरों को बचाने और पर्यटन के विकास के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है। ललितपुर की प्राचीन धरोहरें विश्व स्तरीय हैं, जिन्हें विकसित करने और संजोने की आवश्यकता है। मेरा प्रयास है कि सभी पर्यटन स्थल बिजली, पानी, सड़क से जुड़े और सभी जगह गाइड की व्यवस्था हो। ललितपुर में अभी तक 22 पर्यटन स्थल चिन्हित किये गये हैं, इनमें से 12 पर्यटनों स्थलों को विकसित करने के लिए डीपीआर शासन को भेजी गई है। यहां की संस्कृति, 12 बांध, किले, इमारतें एवं अनेकों प्राकृतिक स्थल दर्शनीय है। खजुराहो, ओरछा, चंदेरी के साथ ललितपुर को पर्यटन सर्किट में जोड़ दिया जाये तो यहां पर पर्यटकों का आवागमन और बढ़ जाएगा। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बुंदेलखंड के धरोहर स्थलों, इतिहास, संस्कृति एवं पर्यटन पर अपनी प्रस्तुति दी। नेहरू महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. पंकज शर्मा ने यहां के इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डाला। वहीं, आर्किटेक्ट सौरभ श्रीवास्तव ने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन दिया। वहीं छत्रपाति शिवाजी एमएसडी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र प्रकाश ने यहां के सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की। इन्टैक दिल्ली से आये अभिषेक दास ने हैरिटेज एजूकेशन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए हैरिटेज के विविध रूपों को दर्शाया। अध्यक्षता करते हुए इंटैक के संयोजक संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि इन्टैक यहां की धरोहरों को संरक्षित किये एवं विकसित किये जाने व यहां की इतिहास और संस्कृति को बचाने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रहा है और यह मुहिम आगे जारी रहेगी। इस मौके पर भगवत नारायण शर्मा, ओमप्रकाश बिरथरे, राजेंद्र त्रिपाठी, नीरज वर्धमान, राजीव शर्मा, डॉ. दीपक चौबे, सुरेंद्र नारायण शर्मा, आचार्य सत्यनारायण तिवारी, गोविंद व्यास, सरदार मंजीत सिंह, पार्षद भारत भूषण चौरसिया, रमाकान्त तिवारी, करुणाकर शर्मा, नीरज चतुर्वेदी, विनोद त्रिपाठी, अनिल दीक्षित, आशाराम तिवारी, रामस्वरूप नामदेव मौजूद रहे। संचालन रमाकांत तिवारी ने किया। अंत में आभार फिरोज इकबाल डायमंड ने जताया।
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