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भव्यता के साथ मनाई गई भगवान महावीर जंयती

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भव्यता के साथ मनाई भगवान महावीर जंयती
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ललितपुर।
भगवान महावीर स्वामी का 2617वां जन्मोत्सव अगाध श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया। जैन मंदिरों में परंपरानुसार महावीर स्वामी का पूजन अभिषेक कर विधिविधान के साथ जन्मोत्सव मनाया गया। मंदिरों में तीर्थंकर बालक वर्धमान का पालना झुलाने के लिए बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु पहुंचे। बृहस्पतिवार की शाम को नगर के मुख्य मार्गों से भगवान महावीर जयंती पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें जैन समाज के साथ ही नगर के सभी वर्गों के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल होकर भगवान महावीर के अहिंसा के संदेशों को आत्मसात किया। शोभायात्रा का स्थानीय लोगों, समाजसेवियों व विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह स्वागत किया गया।
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महावीर जयंती पर क्षेत्रपाल मंदिर में मुख्य आयोजन आचार्य ज्ञानसागर महाराज के सानिध्य में हुआ, जिसमें भगवान का पालना झूला किया गया। इस मौके पर आचार्यश्री ने धर्मसभा में भारतीय संस्कृति के गौरवशाली महत्व पर प्रकाश डाला और कहा अहिंसा द्वारा ही विश्व में शांति का साम्राज्य स्थापित हो सकता है। विश्व के मानव पटल पर आज भी भगवान महावीर स्थापित हैं। भगवान महावीर अहिंसा के अग्रदूत रहे। विश्व का सबसे पहला स्तूप जैन स्तूप मथुरा में निकला था। जैन धर्म अति प्राचीन धर्म है, आज अमेरिका में 70 सेंटरों पर जैन धर्म पर रिसर्च हो रहे हैं। भगवान महावीर की जयंती पर सभी को संकल्प लेना होगा कि जीवन में कुछ सुधार आए। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जिओ और जीने दो का सिद्धांत हमें अपनाना होगा। उन्होंने शाकाहारी रहने का भी संकल्प किया। जैन पंचायत ने राज्यमंत्री को सम्मानित किया। इसके बाद शाम को करीब चार बजे से श्रीअटा मंदिर से भगवान महावीर जयंती के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सबसे आगे श्रद्धालु धर्म ध्वज लेकर चल रहे थे। इसके बाद बैंडों की धुन पर जैन समुदाय के लोग नाचते झूमते हुए खुशियां मनाते नजर आए। फिर अखाड़ों का भव्य व हैरतअंगेज प्रदर्शन करते पहलवान अपने करतब दिखा रहे थे। मध्य में एक झांकी में भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश से लोगों को प्रेरित किया गया। शोभायात्रा में मुख्य आकर्षण का केंद्र सरदार वेषभूषा में हैरत अंगेज करतब रहा। जब कुछ सरदारों की टोली जेसीबी मशीनों के सहारे हैरतअंगेज प्रदर्शन कर रहे जथे। यह सरदार अपने शरीर पर एक लकड़ी का पटिया रखकर लेटे रहते और जेसीबी मशीन उस पटिया के ऊपर से निकल जाती थी। यह प्रदर्शन शोभायात्रा में जगह-जगह देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा भी शोभायात्रा में अखाड़ों में अपने करतब दिखाए गए। शोभायात्रा में भगवान महावीर के चित्रों को वाहन पर रखकर लंबी-लंबी कतारों में लगी रही, तो रथों पर भी भगवान महावीर के चित्रों को रखकर अहिंसा का संदेश दिया गया। जैन समुदाय के लोग शोभायात्रा में भगवान महावीर के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्घालु शामिल हुए। शोभायात्रा अटामंदिर से शुरु होकर सावरकर चौक,घंटाघर, सदरकांटा, पानी की बड़ी टंकी, तलैयापुरा, महावीरपुरा, रावरपुरा, चौबयाना, नदीपुरा, आजादचौक होते हुए वापस अटामंदिर पहुंची। शोभायात्रा का समाजसेवियों ने जगह-जगह पेय व फल वितरित कर भव्य स्वागत किया। वहीं लोहापीतल बाजार में एक संगठन द्वारा पूरे दिन भर पांडाल लगाकर गरीबों को भोजन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
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