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Lalitpur News: आग से गेहूं की 20 एकड़ फसल जलकर राख

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। गेहूं की फसलों में आग लगने की घटनाओं से किसान सहम गए हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जा रहा, जब खेतों में आग न लग रही हो। मंगलवार को थाना सौजना अंतर्गत ग्राम खिरिया भारंजू में आग से 20 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ग्राम कपासी में भी फसल अवशेषों में आग लग गई। आसपास खेतों में खड़ी फसल तक लपट पहुंचने से पहले किसानों ने आग पर काबू पा लिया।
ग्राम खिरिया भारंजू में मंगलवार सुबह खेतों में खड़ी फसल में आग लग गई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन यह तेजी से आगे बढ़ रही थी। यह देख गांव के लोगों ने पाइप बिछाकर मोटर चलाया और इसकी मदद से आग पर काबू पाया। लेकिन, तब तक करीब 20 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जल चुकी थी। सौजना पुलिस व तहसीलदार सहित लेखपाल मौके पर पहुंचा और नुकसान का जायजा लिया। किसानों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता देने की मांग की।
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वहीं, थाना जाखलौन के ग्राम पंचायत कपासी में भी गेहूं के कटे अवशेषों में आग लग गई। इसके बढ़ने पर आसपास के खेतों के किसान चिंतित हो गए। ग्रामीणों ने पानी डालकर आग पर काबू पाया। आग से एक-दो किसानों के भूसे के ढेर ही जलकर नष्ट हुए।

मदनपुर के जंगल में घंटों बाद बुझी आग
तहसील मड़ावरा के मदनपुर पश्चिमी वनबीट के जंगलों में सोमवार को आग लग गई। इसके लगातार बढ़ने और ग्राम बिरौंदा के नजदीक खेतों व आबादी तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए किसानों में दहशत फैल गई। मदनपुर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया। मंगलवार सुबह आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने का कारण नहीं पता चल पाया है।
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कहीं शॉर्ट सर्किट तो कहीं लापरवाही बन रही कारण
एक मार्च से 30 जून तक को आग का मौसम कहा जाता है। इस दौरान चिंगारी से भी आग भड़क जाती है। मार्च में विभिन्न क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक आग लगने की घटनाएं हुईं। 100 एकड़ से अधिक गेहूं की फसल जल चुकी है। आग लगने का कारण कहीं खेतों से होकर गुजरी हाईटेंशन लाइन में शॉर्ट सर्किट रहा तो कहीं लोगों की लापरवाही आग का कारण बनी।
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चंद मिनटों में अरमान हो रहे राख
आग लगने से किसानों के अरमान चंद मिनटों में राख हो जा रहे हैं। यह सब आंखों के सामने होते देखना किसानों के लिए आसान नहीं है। कर्ज, घर चलाने की जिम्मेदारी, घाटे का बोझ, बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह का खर्च, दवा और मवेशियों के लिए चारे-भूसे की व्यवस्था उन्हें लंबे समय तक परेशान करती है।
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