संयम स्वर्ण महोत्सव पर कल निकलेगी महाआरती
- जैन पंचायत में होंगी विविध प्रतियोगिताएं आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। आचार्य विद्यासागर महाराज का 50 वां संयम स्वर्ण महोत्सव के समापन पर रविवार को दिगंबर जैन पंचायत ने बैठक आयोजित की। निणर्य लिया कि 17 जुलाई को अटामंदिर व जैन नया मंदिर नईबस्ती से नगर में महा आरती निकाली जाएगी। जबकि घंटाघर पर जैन पंचायत की ओर से कई प्रतियोगिताएं आयोजित भी होंगी।
अतिशय जैन मंदिर क्षेत्रपाल में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज को पंचम युग के ऋषिराज महाकव्य मूकमाटी के रचयिता अध्यात्म सरोवर के राजहंस बताया। उन्होंने अपनी अनवरत साधना से जीवन की कलात्मकता को भारतीय संस्कृति के अनुरूप अभिव्यक्त किया है। बताया कि 17 जुलाई को शाम छह बजे से जैन अटामंदिर एवं नईबस्ती जैन मंदिर से महा आरती लेकर श्रद्धालु जन नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए क्षेत्रपाल मंदिर पहुंचेंगे। आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि अविचल सागर महाराज का सानिध्य भी रहेगा। इस दिन आचार्य छत्तीसी विधान अटा जैन मंदिर में महिला संगठनों द्वारा आयोजित जाएगा। इसके साथ ही जैन बैंक फोरम यूनिट द्वारा स्वहस्ति चित्र प्रतियोगिता, जैन टीचर्स सोशल ग्रुप द्वारा विद्याधर से विद्यासागर, मूकमाटी आदि ग्रंथों पर आधारित लेखन प्रतियोगिता, ग्रीटिंग कार्ड बनाओ प्रतियोगिता, जैन शिक्षक सामाजिक समूह द्वारा हिंदी अपनाओ हस्ताक्षर अभियान घंटाघर के पास सुबह 9.30 बजे से शुरू होगा। जैन मंदिरों में सुबह पूजन अभिषेक के साथ आचार्यश्री का पूजन भी श्रद्धालुओं द्वारा किया जाएगा। इस मौके पर अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टड़ैया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मीना इमलिया, अमित जैन, सतीश नजा, प्रदीप जैन, विजय जैन, जिनेंद्र जैन, विजय जैन, सुधीर जैन, आनंद जैन व राजेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
---बॉक्स---
खजुराहो में होगा मुख्य आयोजन
जैन पंचायत के मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि संयम स्वर्ण महोत्सव का मुख्य आयोजन 17 जुलाई को आचार्य विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में होगा, जिसमें शामिल होने के लिए नगर से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। इस दिन आचार्यश्री के दर्शन कर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेेंगे। बताया गया कि आचार्यश्री के सानिध्य में संयम स्वर्ण महोत्सव मनाने का सौभाग्य खजुराहो अतिशय क्षेत्र को मिला, यहां भगवान शांतिनाथ का अति प्राचीन जिनालय विश्वविख्यात है।