ललितपुर। सीतापाठ स्थित सिद्धेश्वर हजारिया महादेव मंदिर पर सहरिया जनजाति को चतुर्थ सामूहिक आदर्श कन्या विवाह महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें 18 जोड़ों ने दांपत्य सूत्र में बंधकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया।
सोमवार को सीता पाठ स्थित श्री हजारिया महादेव मंदिर परिसर में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध सेवा समर्पण संस्थान के तत्वावधान में सहरिया जनजाति का सामूहिक आदर्श कन्या विवाह महोत्सव आयोजित किया गया। शुभारंभ से पूर्व श्री सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।
इसके बाद वैवाहिक कार्यक्रमों की विभिन्न रस्में शुरू की गईं। मंच पर एक साथ 18 नवयुगल जोड़ों ने एक दूसरे को वर माला पहनाईं। इसके बाद हिंदू रीति रिवाज के अनुसार सभी वैवाहिक रस्मों के साथ अग्नि के सात फेरे लेकर एक-दूजे के हो गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बवेेले सप्पू ने की। मुख्य अतिथि जेके सिंह और विशिष्ट अतिथि सरदार वीके सिंह, मनमोहन जड़िया व नपाध्यक्ष सुभाष जायसवाल रहे। मुख्य वक्ता मनीष सौमया, वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय संगठन मंत्री पंकज सिंह, प्रांतीय संगठन मंत्री डा. रमाकांत गुप्त, क्षेत्रीय संगठन मंत्री मणिराम पाल, अर्जुनदास, अनिल निमानी उपस्थित रहे।
विभिन्न सामाजिक और गैर सामाजिक संगठनों ने वर-वधुओं को क्षमतानुसार सामग्री व उपहार भेंट किए। ने भी सम्मेलन में खाद्यान्न भेंट दिया। इस मौके पर मनीष अग्रवाल, नरेंद्र पाठक, सुबोध शर्मा, रमेश दुबे, संतोष पाठक, पवन कौशिक, रामगोपाल नामदेव, काशीनाथ आदि मौजूद रहे। संचालन सुबोध गोस्वामी ने किया।
विचार गोष्ठी हुई
वर्णी नगर मड़ावरा में अक्षय तृतीय पर्व पर दिगंबर जैन महासमिति इकाई की विचार गोष्ठी हुई। अध्यक्षता समिति अध्यक्ष डा. राकेश सिंघई ने की। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया पर्व से ही जैन धर्म का परचम फहराया था। पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था। राजदरबार में बैठे थे, तभी नीलांजना का नृत्य देखकर उन्हें वैराग्य हो गया था। इस मौके रमेश चंद्र जैन, नीलेश जैन, प्रवीण सेठ, धर्मेंद्र सर्राफ, कविता सिंघई मौजूद रहे।