ललितपुर। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी नगर का प्राचीन और धार्मिक आस्था का केंद्र सुम्मेरा तालाब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो सका है। तालाब में चहुंओर गंदगी पसरी है। तालाब में लगे कांस, मुरार व जलकुंभी प्रशासन की उदासीनता के गवाह हैं। इन हालात को देखकर न केवल श्रद्धालुगण, बल्कि सौंदर्यीकरण का इंतजार कर रहे नगरवासी आहत हैं।
सुम्मेरा तालाब का नाम राजा सुम्मेर सिंह के नाम पर पड़ा है। ऐसी किंवदंती है कि इस तालाब में नहाने से चर्म रोग दूर हो जाते थे। धीरे-धीरे यह तालाब धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया। डोल ग्यारस पर भगवान का जल विहार होने लगा। लेकिन, प्रशासन ने तालाब के रखरखाव पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि तालाब का पानी प्रदूषित हो गया और कांस, मुरार, कमल व जलकुंभी ने पैर पसार लिए।
तालाब के शुद्धीकरण की मांग उठने लगी। विभिन्न संगठनों ने अभियान छेड़ दिया। उस दौरान शासन ने तालाब के सौंदर्यीकरण को धनराशि आवंटित की। इससे नगर पालिका परिषद ने तालाब में इनलेट व आउटलेट पाइप लाइन डलवाई, ताकि प्रदूषित पानी को बाहर किया जा सके। कुछ हद तक नगर पालिका प्रदूषित पानी की निकासी में कामयाब हो गया। शेष धनराशि को इस्तेमाल में लिया जाता कि इससे पहले लोक निर्माण विभाग ने उस दौरान सत्तारूढ़ दल की रैली के मंच की तैयारी पर खर्च कर दिया। ऐसे में आगे का काम अटक गया, जो आज तक अधूरा है।
पर्यटन विभाग ने तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई थी, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ सकी। दो महीने से तालाब का काम ठप पड़ा है। वर्तमान में तालाब के बीचों बीच एक हट (झोपड़ी) दिखाई देती है। इसके अलावा मंदिर परिसर में गेट व तालाब के किनारे की पिचिंग अधूरी पड़ी है। वहीं, तालाब में कांस, मुरार, जल कुंभी व कमल के पौधे लहलहा रहे हैं। नगर पालिका की नाव चलाने की योजना ठप पड़ गई। नाव तालाब के किनारे पड़ी हैं। तालाब का काम रुकने से लोगों में गुस्सा है। लोगों की मांग है कि बारिश से पहले तालाब की खुदाई व सफाई का काम पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
खाली तालाब से खिसका भूगर्भ जल स्तर
नगर के बीचोंबीच तालाब होने से विभिन्न मुहल्लों का जलस्तर ऊपर रहता था। वर्तमान में तालाब खाली होने से जगह-जगह भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। इस कारण मकानों की बोरिंगों में पानी कम निकलने लगा है तो सार्वजनिक हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं।
मच्छरों का बना बसेरा
जिस तालाब से कभी रोग दूर होते थे, आज वही तालाब मच्छरों का बसेरा बन गया है। मुहल्लेवासियों का कहना है कि पर्यटन विभाग के काम में अड़चनें पैदा की जा रही हैं।
धरना- प्रदर्शन कर भूले संगठन
तालाब के सौंदर्यीकरण की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने महीनों धरना-प्रदर्शन किया। आज उन संगठनों का तालाब सौंदर्यीकरण से कोई लेना- देना नहीं रहा।
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महंत ने भी लड़ी थी लड़ाई
महंत अमावस गिरि ने तालाब के सौंदर्यीकरण की लड़ाई लड़ी थी। एक बार तो उन्होंने भरी दोपहरी में सुम्मेरा तालाब पर अनशन शुरू कर दिया था। उस दौरान उन्होंने तालाब सौंदर्यीकरण के लिए आवंटित पैसे का सही इस्तेमाल करने की मांग उठाई थी। लेकिन, अब इस लड़ाई को कोई आगे नहीं लाना चाहता।