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जिले में बारिश कम होने नहीं भरे बांध, सूखे की आहट

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कम बारिश से नहीं भरे बांध, सूखे की आहट
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ललितपुर।
जिले में बारिश कम होने का असर बांधों पर साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई माह के अंतिम दिनों में भी बांधों में पर्याप्त पानी नहीं है। यदि इसी गति से बारिश का सिलसिला चलता रहा तो बांधों का भरना मुश्किल हो जाएगा। किसानों को अभी से रबी सीजन की सिंचाई की चिंता सताने लगी है।
बुंदेलखंड में सिंचाई की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके निदान के लिए बांधों का निर्माण किया जा रहा है। ललितपुर इस मामले में सबसे आगे है। ललितपुर तहसील के अंतर्गत गोविंद सागर बांध, सजनम बांध, जामनी बांध, महरौनी तहसील अंतर्गत जामनी बांध, रोहणी बांध, तालबेहट तहसील अंतर्गत माताटीला बांध, शहजाद बांध बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त कचनौंदा बांध भी बन चुका है तो जमड़ार, भावनी, उटारी, भौरट, निर्माणधीन हैं। पूर्व से निर्मित बांधों का भंडारण बारिश पर निर्भर है। जब पर्याप्त मात्रा में बारिश होती है तो जिले के सभी बांध लबालब हो जाते हैं और कम बारिश पर खाली रह जाते हैं। इस सीजन में ऐसा ही हाल बनता जा रहा है। वर्ष 2016 के जुलाई माह में 486.53 मिमी बारिश हुई थी, जो इस साल अब तक 353 मिमी ही सिमटकर रह गई है। बारिश कम होने से बांध भी खाली नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं कि अकेले जिले में कम बारिश हुई है। मध्य प्रदेश के समीपवर्ती जिलों में कम बारिश महसूस की जा रही है। इसका आंकलन बेतवा नदी को देखकर किया जा सकता है। बीते सालों में मध्य प्रदेश का पानी बेतवा से होकर राजघाट व माताटीला बांध में पहुंच जाता था, जिससे दोनों बांध लबालब हो जाते थे। वर्तमान में दोनों बांध खाली दिखाई दे रहे हैं। अन्य बांधों का भी यही हाल है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बनने लगी हैं। किसानों का कहना है कि जिले का अधिकांश रकवा बांधों की सिंचाई से जुड़ा हुआ है। यदि बांध बरसात में नहीं भर पाए तो रबी सीजन का रकवा पिछले साल के मुकाबले कम हो जाएगा।
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तालाब, पोखरों में भी नहीं पहुंचा पानी
इस साल जिले में काफी कम बरसात हुई है। इससे भूजल स्तर ऊपर नहीं हो सका है। कूप सहित तालाब, पोखरों में नाम मात्र का पानी उपलब्ध है। यदि ऐसी ही बारिश हुई तो रबी सीजन में सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। अब सारा दारोमदार अगस्त माह की बारिश पर निर्भर है। इस माह में भी जुलाई माह की तरह पानी बरसा तो सूखे के हालात पैदा हो जाएंगे।
अरविंद प्रजापति

किसानों के नसीब में यही लिखा
बुंदेलखंड के किसानों को भाग्य प्रकृति से जुड़ा हुआ है। इंद्र देवता जब मेहरबान होते हैं तो किसानों के घर उपज से भर जाते हैं, जब नाराज होते हैं तो वह दाने-दाने के लिए तरसा देते हैं। पिछले कई सालों से बुंदेलखंड का किसान परेशान है। कभी ओलावृष्टि, अतिवृष्टि तो कभी सूखा। इससे छुटकारा की उम्मीद जगी थी कि मौजूदा बारिश ने सभी को निराश कर दिया।
रामजीलाल पाठक

यह है बांधों की स्थिति
राजघाट बांध का अधिकतम जलस्तर 371 मीटर है, जिसके मुकाबले जल स्तर 361.70 मीटर पहुंच सका है। माताटीला बांध का अधिकतम जलस्तर 308.45 मीटर है, जिसके सापेक्ष 301.26 मीटर जलस्तर हो पाया है। इसी प्रकार गोविंद सागर बांध में जलस्तर 363.93 के मुकाबले 359.12 मीटर, शहजाद बांध में जलस्तर 321.80 के सापेक्ष 317.46 मीटर, जामनी बांध में 403.55 के मुकाबले 328.31 मीटर, सजनाम बांध में जल स्तर 373.20 के मुकाबले 369.40 मीटर, रोहणी बांध में 396.39 के सापेक्ष 393.15 मीटर पहुंचा है।
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इतना कम है पानी
गोविंद सागर बांध में 4.81 मीटर, शहजाद बांध में 4.34 मीटर, जामनी बांध में 524 मीटर, सजनाम बांध में 3.80 मीटर, रोहणी बांध में 324 मीटर जलस्तर कम है।

आज इतनी हुई बारिश
ललितपुर तहसील में 90 मिमी, महरौनी में 67 मिमी, तालबेहट में 15 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस तरह जिले में आज कुल 172 मिमी बारिश हुई है।
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