कहां गए ग्रामीणों के साठ आवेदन
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अफसरों ने कहा मुख्यमंत्री पोर्टल पर नहीं आए
विवाह योजना का तीन साले से नहीं मिला लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल पर अफसरों भ्रामक सूचनाएं दी जा रहीं हैं। ऐसा ही मामला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की रिपोर्ट में देखने को मिला। पाली तहसील क्षेत्र से ग्रामीणों ने विवाह योजना के अंतर्गत साठ से अधिक आवेदन किए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पोर्टल के अनुसार एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिकायत पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को समय से निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। हुए हैं। हाल ही में पाली निवासी प्रियंक जैन ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत की कि विवाह योजना के अंतर्गत पाली तहसील में पिछले तीन सालों से एक भी व्यक्ति को लाभ नहीं मिला है। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी पियूष चंद्र राय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह योजना बंद रही और 2016-17 में इस योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के कार्यालय में एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुए। जबकि ऑनलाइन किए गए आवेदन के आंकड़ों की मानें तो पाली तहसील से पिछड़ा वर्ग के साठ से अधिक आवेदन किए गए थे। यह सभी आवेदन वित्तीय वर्ष 2016-17 में ही किए गए हैं और सभी पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं। इसके अलावा एसडीएम ने इन आवेदन पत्रों की जांच कर 18 मार्च 2017 को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में भेजा जाना बताया जा रहा है।
यह होता है क्रम
विभागीय अधिकारियों की मानें तो विवाह योजना के लिए किया गया ऑनलाइन आवेदन एसडीएम और बीडीओ के पास जांच के लिए भेज दिया जाता है। इसके बाद उक्त अधिकारी आवेदन की जांच कर उसे संबंधित विभाग को ऑनलाइन और हार्डकॉपी के रूप में प्रेषित कर देते हैं। इसके लिए संबंधित विभाग लाभार्थियों की सूची तैयार उन्हें जिलाधिकारी से अनुमोदित करवाकर उन्हें लाभ प्रदान कर देते हैं।
इन्होंने किया था आवेदन
पाली तहसील से वित्तीय वर्ष 2016-17 में नारायण, मनोहर, लखन लाल, पवन कुमार, कन्हैयालालन, राजकुमार, रतन लाल, शीला, दीनदयाल साहू, गोविंद दास, खेम चंद्र, लक्ष्मीनारायण समेत साठ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। इसमें से एक भी लाभार्थी को इस योजना का लाभ नहीं दिया गया और न ही आवेदन निरस्त होने का कोई कारण बताया गया है।
मामले से झाड़ा पल्ला
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी पियूष चंद्र राय ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन की जांच एसडीएम स्तर से होने के बाद सीधे लखनऊ भेजी जाती हैं। वहां से लाभार्थियों की लिस्ट और बजट आने के बाद लाभ दिया जाता है। इस पूरे प्रकरण में विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है।