हाइटेंशन लाइनों के नीचे बसों में बैठाई रही सवारियां
ललितपुर। शहर में जगह-जगह फैले हाइटेंशन बिजली के तारों के नीचे कहीं बसों में सवारियां भरी जा रही हैं, तो कहीं मकानों के ऊपर झूल रहे हैं। बहुत से क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनों के नीचे न तो गार्डिंग लगी है और न ही सुरक्षा के चलते इन लाइनों को ही हटाया जा सका है। इससे इन क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइन से मौत का खतरा हर पल मंडराता रहता है।
बस स्टैंड की ओर जाने वाले मार्ग पर बीएसएनएल कॉलोनी के सामने हाइटेंशन लाइनों के नीचे कई जगहों की बसें खड़ी होकर सवारियां भरती हैं। बसों के जाने के बाद ही वहां ऑटो टैक्सियां खड़ी होकर सवारियां भरती हैं। बसों की छतों पर कर्मचारियों द्वारा हाइटेंशन लाइनों से कुछ ही नीचे यात्रियों का सामान रखा जाता है। कई बार तो यहां बसों की छतों पर लोहे के सरिया या फिर अन्य इसी प्रकार के सामान भी लादे जाते हैं, जिससे बसों की छतों पर सामान रखने के लिए हर पल बिजली तारों को छूने का खतरा बना रहता है। बीआरसी जखौरा केंद्र से अस्पताल रोड पर दायीं ओर हाइटेंशन लाइनों के नीचे दुकानें भी अस्थाई रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि यहां हाइटेंशन तारों की गार्डिंग टूट चुकी है और आए दिन विद्युत फाल्ट होने पर तार टूटने की घटनाएं होती रहती हैं। यहां न तो दुकान संचालकों को कोई दुर्घटना की चिंता है और न ही विभाग द्वारा यहां कोई ठोस इंतजाम किए गए हैं। इसी प्रकार मुहल्ला पिसनारी में नहर के बायीं ओर हाइटेंशन लाइनों के नीचे मकान बन गए हैं, जिनमें सैकड़ों लोग निवास कर रहे हैं और मकानों की छतों पर बच्चे घूमते नजर आते हैं।
ऐसा नहीं है कि यह मामला बिजली विभाग के संज्ञान में न आया है, लेकिन अब तक इसके लिए ठोस पहल नहीं की गई है। जबकि बारिश के दौरान हर समय यहां करंट का खतरा बना रहता है और गर्मियों के दौरान भी ओवरलोड में कई बार यहां तार टूटकर मकानों की छतों पर ही गिर जाते हैं। हालांकि यहां के भवन स्वामियों द्वारा सुरक्षा के लिहाज से खुद ही बिजली तारों पर प्लास्टिक के तार चपेट दिए हैं, ताकि काफी हद तक खतरे से बचा जा सके।
शहर में अधिकांश जगह अंडरग्राउंड केबल बिछाई जा रही है, जहां भी गार्डिंग नहीं है, उस क्षेत्र के लिए एस्टीमेट बनाकर गार्डिंग लगवाई जाएगी। पिसनारी मुहल्ले में हाइटेंशन लाइनों के नीचे मकान बनाए गए हैं, इसके लिए समाधान निकाला जा रहा है।
- शैलेंद्र कुमार कटियार, अधिशासी अभियंता, विद्युत खंड प्रथम।