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शासनादेश को दरकिनार कर अपात्र को दिलाई परीक्षा, हुआ चयन

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शासनादेश को दरकिनार कर अपात्र से दिलवाई परीक्षा, हुआ चयन
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ललितपुर। सह-समन्वयकों की चयन प्रक्रिया पूर्व हो चुकी है। इस प्रक्रिया में शासनादेशों का दरकिनार करते हुए अपात्र घोषित हो चुके आवेदक को प्रक्रिया में शामिल किया गया है और उसका चयन भी हो चुका है। उक्त नव चयनित एबीआरसी को परीक्षा में शामिल जिलाधिकारी की अनुमति पर किया गया है, जबकि इसको पूर्व में एबीआरसी पद से तत्कालीन जिलाधिकारी के ही आदेश पर हटाया गया था। इसमें वर्तमान जिलाधिकारी ने तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश को गलत ठहराया है।
सह-समन्वयकों की नवीन चयन प्रक्रिया पूर्ण कर नव चयनित एबीआरसी की सूची भी जारी कर दी गई है। इस नवीन चयन प्रक्रिया में सह-समन्वयक चयन समिति के अधिकारियों व सर्व शिक्षा अभियान जिला परियोजना समिति के अध्यक्ष द्वारा शासनादेश को दर किनार किया गया है। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जारी किये शासनादेश में साफ निर्देश दिए गये हैं कि यदि किसी आवेदक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई हो व आपराधिक कार्रवाई चल रही हो तो ऐसे आवेदक को अपात्र घोषित कर चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं होने दिया जाए। स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न केवल अपात्रों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है, बल्कि एबीआरसी पद के लिए उनका चयन भी कर दिया गया है। गौरतलब है कि नवीन सह-समन्वयकों में गणित विषय से चयनित बसंत जैन और सामाजिक विषय से चयनित अशोक कुमार श्रीवास दोनों ही इससे पूर्व में भी एबीआरसी थी और दोनों की जखौरा ब्लॉक क्षेत्र में तैनात थे। इसी बात को लेकर दोनों को बीच विवाद हो गया था और दोनों ने एक-दूसरे के साथ मारपीट व अभद्रता भी कर दी थी। इस घटना के दौरान मौके पर उपस्थित तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी की गवाही पर और तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देशन पर बीएसए द्वारा दोनों को ही एबीआरसी से पद से हटाकर अपने-अपने मूल विद्यालय भेज दिया था। इसके साथ ही दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत करा दिया था, जो वर्तमान में विचाराधीन है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा दोनों की अपात्र आवेदकों को नवीन चयन परीक्षा में शामिल भी किया गया और दोनों का एबीआरसी पद पर दोबारा चयन भी कर दिया है। इससे पूर्व में ही बसंत जैन पर संगीन आरोप लगते रहे हैं, जिस पर जांच भी गई, लेकिन मामले को हमेशा ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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चस्पा सूची से नाम नहीं लगाकर किया गया था गुमराह
सह-समन्वयक की नवीन चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कुल 114 सहायक शिक्षकों ने आवेदन किया था। इनमें सह-समन्वयक चयन समिति द्वारा 14 अवेदकों को अपात्र घोषित किया गया था। डायट में आयोजित लिखित परीक्षा के दौरान नोटिस बोर्ड पर अपात्रों की सूची चस्पा थी, जिसमें दोनों आवेदक बसंत जैन व अशोक श्रीवास के नाम शामिल है, जो गुमराह करने के लिए भी एक माध्यम था। ताकि परीक्षा के दौरान इसका किसी के द्वारा कोई विरोध नहीं किया जाए।
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डीएम ने दी थी अनुमति
बसंत जैन व अशोक कुमार श्रीवास को एबीआरसी चयन समिति के द्वारा शासनादेश के क्रम में ही अपात्र घोषित किया गया था। दोनों के ही खिलाफ पूर्व में विभागीय कार्रवाई की गई थी। दोनों ने ही जिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी थी, जिसमें उन्होंने पूर्व में की गई कार्रवाई को द्विवेष भावना के चलते बताया है। यह बात जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अम्बरीष कुमार ने कही है। अब यहां यह सवाल खड़ा होता है कि यदि द्वेष भावना के चलते कार्रवाई की जाती है तो दोनों में से एक पक्ष पर होती, लेकिन कार्रवाई दोनों एबीआरसी के खिलाफ की गई थी।
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