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छतो से गिर रहा पानी, दाह संस्कार के लिए बन रहा समस्या

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छतों से गिर रहा पानी, दाह संस्कार के लिए बन रहा समस्या
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर में बने मुक्तिधाम रख-रखाव के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। इलाईट क्षेत्र के मुक्तिधाम में अंतिम दाह संस्कार के लिए बने दोनों ही शेडों की छतों से बरसात का पानी गिरने लगा है। इससे दाह संस्कार में काफी समस्या आने लगी है। दाह संस्कार के लिए तैयार अर्थी की लकड़ियां बरसात के पानी गीली हो जाती है। सबसे ज्यादा तब आती है, जब दाह संस्कार के बीच में ही बरसात का पानी छतों से गिरने लगे।
शहर में कुल चार मुक्तिधाम है, जो इलाइट चौराहा, सुरईघाट, गांधी नगर व नेहरू नगर में बने हुई है। इन चारों मुक्तिधामों में नगर पालिका समेत अन्य संस्थानों व विकास निधियों से दाह संस्कार के लिए पक्के शेडों का निर्माण कराया गया है, जिनको बने हुए वर्षों बीत गए हैं। इन मुक्तिधामों पर नगर पालिका का स्वामित्व हैं और इनका रख-रखाव करने की जिम्मेदारी भी नगर पालिका की ही है। विगत कई वर्षों से नगर पालिका रवैया इन मुक्तिधामों के प्रति काफी उदासीन रहा है। इसी का नतीजा है कि वर्तमान में इलाईट मुक्तिधाम में दाह संस्कार के लिए बने दोनों शेेडों की छतें जर्जर व क्षतिग्रस्त हो चुकी है। दोनों शेडों में एक की छत टीन की है और तो दूसरे शेड पर पक्की छत बनी हुई है। नियमित रख-रखाव नहीं हो पाने के कारण टीन शेड अपना अस्तित्व खोने की कगार पर आ गया है, तो वहीं पक्की छत का लेंअर गिरने लगा है। वर्तमान में चल रहे बरसात के मौसम में लोगों को दाह संस्कार के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जब बरसात होती है छतों से पानी गिरने लगता है और इस बरसात के पानी के कारण दाय संस्कार के लिए तैयार की गई अर्थी की लकड़ियां गीली हो जाती है। कईयों बार तो दाह संस्कार शुरू होने के बाद बरसात होने के कारण सहीं तरह से दाह संस्कार नहीं हो पाता है और फिर मिट्टी का तेल व अन्य जुगाड़ करके दाह संस्कार को पूरा किया जाता है। नगर पालिका द्वारा इन छतों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है, नगर पालिका के इस उदासीन रवैये के कारण स्थानीय नागरिकों में काफी रोष और नाराजगी है। क्योंकि दाह संस्कार से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी होती है और इन असुविधाओं से लोगों की धार्मिक आस्था पर चोट हो रही है। इसके अलावा इन मुक्ति धामों में दाह संस्कार करने के लिए आने वाले लोगों की सुविधा के लिए नगर पालिका द्वारा लगभग 6-7 वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत कुर्सियों, लेंट व स्ट्रीट लाइटों, पानी के लिए नल, पक्के शेेड व मार्ग की सुविधा उपलब्ध कराई थी और सौंदर्यीकरण के लिए यहां पर पड़े-पौधे लगाए गए थे और फुलवारी व बगीजा तैयार की किया गया था और साथ ही पानी का फुब्बारा भी बनाया गया था। जो नियमित रख-रखाव के अभाव में अपना मूल अस्तित्व खो चुके हैं।
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फोटो- 05
पांच सालों तक नहीं डाली नजर
इससे पूर्व नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में शहर के मुक्तिधामों को नया रूप दिया गया था, लेकिन बीते पांच वर्षों में नगर पालिका की इस बोर्ड द्वारा इन मुक्तिधामों की ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया गया। इसी का नतीजा है कि करोड़ों रुपये व्यय होने के बाद वर्तमान समय में समस्त मुक्तिधामों की हालात काफी बदतर हो चुकी है। इलाईट मुक्तिधाम की क्षतिग्रस्त हो चुकी छत वर्तमान में काफी बड़ी समस्या बनी हुई है, इससे बरसात का पानी सीधे ही अर्थी पर गिरता है। यदि नगर पालिका नियमित रुप से अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रही है, तो फिर मुक्तिधामों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्थान को दे दे और उसी की देखरेख में सरकारी धन को व्यय करे। क्योंकि नगर पालिका द्वारा हर वर्ष मुक्तिधामों के रखरखाव के नाम पर व्यय तो किया जाता है, लेकिन धरातल पर काम नजर नहीं आता है।
- अज्जू बाबा
मुक्ति संस्था के संस्थापक।

फोटो- 04
निकटवर्ती मुक्ति धामों से लें सीख
नगर पालिका को जरूरत है कि वह जनपद के निकटवर्ती मुख्य प्रदेश के जनपद टीकमगढ़ में वहां की नगर पालिका के द्वारा ही बनाए गए मुक्तिधाम को देखकर सीख लें। टीमकगढ़ के मुक्तिधाम में सभी तरह की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं और सौंदर्यीकरण के मामले में किसी पार्क से कम नहीं है। इसी तरह जनपद के ही नगर पंचायत तालबेहट में बना नगर पंचायत का मुक्तिधाम भी नगर पालिका के लिए एक सीख है।
-अर्पित अग्रवाल
मुहल्ला, नझाई बाजार निवासी।

फोटो- 06
रखरखाव के अभाव में उजड़ गए मुक्तिधाम
वर्तमान में शहर के इन मुक्तिधामों की जो दुर्दशा है, उसकी मुख्य वजह रखरखाव का अभाव है। नगर पालिका ने चौकीदार तो तैनात किए हैं, लेकिन वह केवल सुबह से शाम पांच बजे तक ही तैनात रहते हैं, इसके बाद मुक्तिधाम की सुरक्षा भगवान भरोसे हो जाती है। यहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा रहता है।
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-सीताराम सेन
मुहल्ला, नई बस्ती निवासी।

फोटो- 03
नहीं रहती साफ-सफाई
मुक्तिधाम में साफ-सफाई के लिए नगर पालिका द्वारा सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन शहर के चारों मुक्तिधामों में हमेशा की गंदगी बनी रहती है। शेड के नीचे और आसपास की गंदगी और बदबू के कारण लोगों का काफी परेशानी होती है। कपड़े आदि सामग्री कई हफ्तों तक वहीं पड़ी रहती है।
- कमलेश पंथ
मुहल्ला, गांधीनगर निवासी।

इनका कहना है
मामला अब तक संज्ञान में आया था, लेकिन जल्द ही क्षतिग्रस्त हो चुकी छतों की मरम्मत कराई जाएगी।
- अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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