बारिश से अन्नदाताओं के चेहरे खिले
सैदपुर (ललितपुर)।
मौसम की बेरुखी से खरीफ की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, जिससे अन्नदाताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी थी। लेकिन रविवार को हुई झमाझम बारिश से सूखती फसलों को जीवन दान मिला है। जिसे देखकर किसानों के चेहरे भी खुशी से खिल उठे हैं।
क्षेत्र के किसानों ने इस वर्ष खरीफ के सीजन में अच्छी फसल की उम्मीद के चलते इस बार बड़ी मात्रा में उर्द, मूंग, तिलहन, सोयाबीन और मूँगफली, मक्का ,ज्वार आदि के बीजों की बुवाई की थी, लेकिन मौसम की बेरुखी के चलते काफी दिनों तक आसमान से पानी की एक बूंद नहीं गिरी। ऊपर से आग उगलती तेज धूप से फसलें मुरझाने लगी थी अच्छी बारिश के लिये किसानों ने धार्मिक अनुष्ठान कराये। गांव-गांव में महिलाओं ने अपने-अपने गांव के देव स्थानों पर जाकर जलाभिषेक किया। साथ ही पूजा-पाठ का आयोजन कर देवताओं को भोग लगाकर परिवार सहित भोजन कर देवताओं को मनाने का कार्य किया गया। बारिश के लिए चिंतित किसानों के लिए सावन माह खुशियों की सौगात लेकर आया। भगवान शिव की कृपा से सावन के पहले सोमवार को क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई।
कीटनाशक व खरपतवार नाशक दवाईयों की बिक्री बढ़ने से व्यापारी खुश
बारिश होने से कीटनाशक और खरपतवार नाशक दवा बेचने वाले दुकानदार भी खुश नजर आने लगे हैं। रविवार और सोमवार की रात्रि में जैसे ही बारिश हुई किसानों के लिए खुशी का ठिकाना न रहा। अगले ही दिन इन दुकानों पर दवा खरीदने के लिए किसानों की भीड़ लग गई और कुछ ही समय में करोड़ों की दवाईयां बिक गई।
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भू जलस्तर में हो रही थी लगातार गिरावट
मानसून की लेटलतीफी के चलते पेयजल संकट भी गहराता जा रहा था। इस वर्ष क्षेत्र में मानसूनी बारिश में लगभग एक माह का विलंब हो चुका है, पिछले वर्ष जून माह में ही अच्छी बारिश हो गई थी और तालाब बांवध चेकडैम नदी नाले सब लबालब हो गये थे। इस बार समय पर बारिश न होने के कारण जल स्तर में भी अच्छी खासी गिरावट देखने को मिल रही थी। इसके कारण क्षेत्र के अधिकतर कुआं पहले ही सूख चुके थे। साथ-साथ हैंडपंप भी जवाब देने लगे थे। जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में बारिश शुरू होने से जलस्तर में सुधार होने की उम्मीद जगी है।