आखिरकार महिला की जमीन हो गई कब्जा मुक्त
कब्जा हटवाने को सात साल से भटक रही थी
इंपेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
सिलावन (ललितपुर)।
मेहनत मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़कर उदरपूर्ति के लिए जैसे-तैसे सात वर्ष पूर्व खेती करने के लिए जमीन खरीदी, लेकिन उस जमीन पर दबंगों का कब्जा होने से एक दाना भी नहीं बो सकने वाली सुकाड़ी गांव की महिला जुगत को उसकी खरीदी जमीन पर आखिरकार कब्जा मिल ही गया।
अमर उजाला ने उक्त मामले को ‘कब्जा हटवाने के लिए सात साल से भटक रही महिला’ शीर्षक से 31 मार्च को प्रकाशित किया था। इसे संज्ञान में लेकर राजस्व विभाग की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर नापतौल कर जमीन को दबंगों से कब्जामुक्त कराकर जुगत को कब्जा दिला दिया। जुगत जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए पिछले सात साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रही थी। बताते चले कि सुकाड़ी गांव निवासी दलित महिला जुगत पत्नी घन्शू जो विगत सात सालों से अपनी ही खरीदी हुई जमीन को दबंगों से कब्जामुक्त कराने के लिए भटक रही थी, लेकिन उसकी कहीं कोई सुनने वाला नहीं था। उसने मेहनत मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़कर बच्चों को पालन पोषण हेतु वर्ष 2011 में आराजी नं. 912 और 913 में जमीन क्रय की थी, जिसका संपूर्ण भुगतान उसने कर दिया था। लेकिन उस जमीन पर वह पैर नहीं रख पा रही थी। वजह उस पर दबंगों का कब्जा था। कब्जा हटवाने के लिए उसने विभागीय अधिकारी और कर्मचारी से लेकर उच्चाधिकारियों तक से गुहार लगाई, किन्तु कही कोई सुनवाई नहीं हुई थी। महिला की इस समस्या को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद हरकत में आए विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर महिला को जमीन पर कब्जा दिला दिया।