फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ई वे बिल के पंच में व्यापारी असमंजस में

विज्ञापन
विज्ञापन
ई-वे बिल के पंच में व्यापारी असमंजस में
विज्ञापन


ललितपुर। एक फरवरी से केंद्रीय ई-वे बिल व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अब व्यापारियों को 50 हजार रुपये या इससे अधिक के माल केे परिवहन के लिए ई-वे बिल उाउनलोड करना होगा। इसमें भी यदि माल ले जाने का स्थान दस किलोमीटर से अधिक है तो ई-वे बिल की दिखाना अनिवार्य होगा। ई-वे बिल होने की दशा में कहीं भी माल का परिवहन नहीं रोका जाएगा। ई-वे बिल पंजीकृत और गैर पंजीकृत सभी व्यापारियों के लिए दिखाना अनिवार्य होगा। ई-वे बिल के भाग ए में पंजीकृत व्यापारियों के मामले में जीएसटी टिन अंकित करने पर पिन कोड सहित पूर्ण विवरण डाटाबेस से उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता के मामले में पिन कोड का अंकन अनिवार्य होगा। शासन द्वारा ई-वे बिल प्रक्रिया लागू तो कर दी गई है, लेकिन पहले ही दिन यह प्रणाली फेल हो गई है। जिसके चलते सर्वर ही ठप हो गया और कोई भी व्यापारी का माल परिवहन के लिए ई-वे बिल डाउनलोड नहीं हो सका। वहीं, शासन द्वारा ई-वे बिल प्रणाली लागू करने के मामले में व्यापारियों व अधिवक्ताओं ने इसमें सुधार और इस प्रणाली से व्यवहारिक कठिनाईयां दूर करने के लिए सिस्टम में बदलाव की आवश्यकता बताया।

व्यापारियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत
सरकार द्वारा व्यापार प्रणाली में सुधार के लिए कोई स्कीम लागू की जाती है और जब उसमें वह अक्षम होती है, तभी संशोधन किया जाता है। जबकि व्यापारियों को उस स्कीम के लागू करने से पहले प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। नई स्कीम लागू होने पर स्वाभाविक रुप से गलतियां तो व्यापारियों से होंगी, जिसमें सुधार करना जरूरी है। शासन द्वारा व्यापारियों के लिए दंडात्मक या ले फीस लगाने की नीति सही नहीं है।
विज्ञापन

लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, कर अधिवक्ता।

ई-वे बिल में व्यवहारिक कठिनाईयां ज्यादा हैं
ई-वे बिल लागू होने के पहले ही दिन पूरा सिस्टम फेल हो गया है। इसमें कई तकनीकी समस्याएं हैं, अभी अधिकारियों को भी पूरी तरह से ई-वे बिल प्रणाली की पूर्ण जानकारी नहीं है। जब भी अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली जाती है तो वह स्वयं ही जानकारी बताने में असमर्थ होते हैं। स्थानीय परिवहन में ई-वे बिल नुकसानदायक है और इसमें व्यवहारिक कठिनाईयां ज्यादा हैं। हालांकि नंबर एक का व्यापार करने वालों को इस प्रणाली से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इसे स्थानीय स्तर पर लागू नहीं होना चाहिए था।
महेंद्र जैन मयूर, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल।

ई-वे बिल से व्यापार की प्रणाली में सुधार होगा
ई-वे बिल से व्यापार की प्रणाली में सुधार आएगा। इससे सभी व्यापारी एक लाइन के दायरे में रहकर व्यापार कर सकेंगे। जिसका लाभ आम लोगों को अधिक होगा। टैक्स अदा नहीं करने की वजह से विकास पर प्रभाव पड़ता है। इससे सभी व्यापारी एक नंबर में कार्य करेंगे और उन्हें टैक्स भी देना होगा, जिससे जो माल खरीदेगा तो उस माल का सही दाम मिल सकेगा और सरकारी रेट के हिसाब से ही माल की बेचेगा। इससे नंबर दो के व्यापार पर रोक लग सकेगी, इससे यह ई-वे बिल सरकार का अच्छा कदम है।
अंशुल भदौरा, व्यापारी।

अच्छे काम में शुरुआत में परेशानी आती है
ई-वे बिल प्रणाली लागू करना शासन की अच्छी पहल है। अच्छे काम करने में शुरुआत में परेशानी आती है। लेकिन इससे नंबर दो के व्यापार पर अंकुश लग सकेगा। सर्वर डाउन रहने से परेशान आ रही है, लेकन इसके लागू से दूरगामी परिणाम अच्छे शाबित होंगे, जिसके फायदे बाद में देखने को मिलेंगे।
विज्ञापन

संदीप सराफ, व्यापारी।

फिलहाल पुरानी व्यवस्था से होगा परिवहन
राष्ट्रीय स्तर पर एक फरवरी से ई-वे बिल लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश में यह इंटर स्टेट एवं इंट्रा स्टेट दोनों संव्यवहारों के लिए लागू है। यह ई वे बिल उत्तर प्रदेश माल एवं सेवाकर अधिनियम की धारा 146 के तहत ऑनलाइन जेनरेट किया जाना है। लेकिन इस पोर्टल पर ई-वे बिल जारी करने में काफी समस्याएं आने के कारण और पोर्टल के न चलने या धीमी गति से चलने की वजह से जनरेट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में माल का परिवहन बाधित हो रहा है और व्यापारियों एवं ट्रांसपोर्टरों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश वाणिज्यकर कमिश्नर कामिनी चौहान रतन ने वाणिज्यकर अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि तकनीकी समस्याओं के चलते अग्रिम आदेशों तक यदि किसी वाहन द्वारा माल के परिवहन के समय वैद्य टैक्स इनवाइस/बिल ऑफ सप्लाई या बिल्टी आदि वैध पत्र होने पर मात्र ई-वे बिल न होने के कारण कोई माल या परिवहन न रोका जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें