ललितपुर। कोतवाली तालबेहट के अंतर्गत एक गांव में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) चंद्रमोहन श्रीवास्तव की अदालत ने एक आरोपी को पॉक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई है। इसके अलावा साढ़े बाइस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
विशेष लोक अभियोजक शासकीय अधिवक्ता रमेश कुमार ने जानकारी दी है कि बीते पांच वर्ष पहले कोतवाली तालबेहट अंतर्गत एक गांव निवासी व्यक्ति ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि दस अक्तूबर 2016 को दोपहर में उसकी सोलह वर्षीय बेटी खेत पर मवेशियों को पानी पिलाने गई थी, जहां गांव के ही अजय व जितेंद्र ने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया। जितेंद्र ने अपने मोबाइल से फोटो भी खींच ली। उन्होंने धमकी भी दी कि यदि घटना के बारे में किसी को बताया कि जान से मार देंगे और फोटो सार्वजनिक कर देंगे।
इसके बाद उसी रात को उसके घर में अजय दिखाई दिया, जिस पर उसने टोका तो वह दीवार फांद कर भाग गया। इसके बाद उसकी बेटी ने पूरी बात बताई। उसने जब उलाहना दिया तो अजय के पिता गोरेलाल ने धमकी दी कि यदि कोई कार्रवाई की तो उसकी बेटी की जिंदगी खराब कर देंगे और उसे जान से मार देंगे। पिता की तहरीर पर कोतवाली तालबेहट में तीनों आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली, जिसमें पिता जान से धमकाने का आरोप था। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सोमवार को न्यायाधीश चंद्रमोहन श्रीवास्तव ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी अजय को पॉक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई।
और कुल साढ़े बाइस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। मामले में आरोपी पिता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया और तीसरे आरोप जितेंद्र का नाम पुलिस ने विवेेचना में अलग कर दिया गया था। वहीं न्यायालय ने अर्थदंड की राशि वसूल होने पर अस्सी प्रतिशत राशि पीड़िता को दिए जाने के आदेश दिए।