सिटी मांटेसरी के अमन ने बनाई विश्व की सबसे लंबी राखी
यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड्स ने दिया प्रमाण पत्र
फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली भी सपत्नीक रहे मौजूद
सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज के कक्षा 11 के छात्र अमन गुलाटी ने भारतीय सैनिकों को समर्पित पेंटिंग के रूप में 870 फुट लंबी, पांच फुट चौड़ी और 20 फुट की गोलाई लिए राखी बनाई है। उनका दावा है कि यह विश्व की सबसे लंबी राखी है। पूर्व में यह रिकार्ड मात्र पांच सौ फुट लंबी राखी का था। रविवार को इस राखी का प्रदर्शन आवास विकास कालोनी के पीछे विशाल मैदान पर किया गया। इस अवसर पर फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डीएम आकाशदीप, एसपी डॉ. एस चनप्पा और इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर मीरा अली विशिष्ट अतिथि रहे।
समारोह में भारतवर्ष में बनने वाले सभी विश्व रिकार्ड की रजिस्टर्ड संस्था यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के भटिंडा पंजाब से आए मंगल जी, रिंकू जी और उनकी टीम ने राखी की लंबाई मापने के साथ बारीकी से निरीक्षण किया। इसके बाद इस रिकार्ड को बनाने का प्रमाण-पत्र प्रदान किया। जांच के दौरान यूनिक बुक ऑफ वल्ड रिकार्ड की टीम ने अमन के बने पिछले 15 दिनों के 6 घंटे के वीडियो व समस्त अभिलेखों का निरीक्षण किया।
इस दौरान निवर्तमान पालिकाध्यक्ष डा. इरा श्रीवास्तव, स्कूल संचालिका लेखनी सेठ, प्रतिभा गुप्ता, अंजुम, बद्री विशाल पांडेय सहित शहर की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और प्रमुख लोग मौजूद रहे। समारोह में स्कूल प्रबंधक प्रेमशंकर सेठ और प्रधानाचार्या मोहिनी रस्तोगी ने सभी का आभार जताया।
कई खासियत है इस राखी की
अमन ने यह राखी पंद्रह दिन में प्रति दिन छह घंटे मेहनत करके बनाई। राखी के दाएं और बायें 425-425 फुट चौड़े पट्टों पर पर्यावरण सुरक्षा, बेटी बचाओ, जल संरक्षण, शिक्षा व सर्वधर्म समभाव आदि संदेशों के साथ-साथ 20 फुट गोलाई लिए मध्य भाग पर उस बहन की वेदना को व्यक्त करने का प्रयास किया गया है, जिसका भाई इस वर्ष रक्षाबंधन पर उससे दूर देश की सेवा के लिए सरहदों पर खड़ा है और पिछले वर्ष इसी बहन ने अपने भाई को राखी बांधी थी और उसकी याद में इस बार उसका मन द्रवित है।
अमन बोला, सभी की प्रेरणा से मिली कामयाबी
सबसे लंबी राखी बनाकर विश्व रिकार्ड बनाने वाले अमन गुलाटी का कहना है कि उसकी इस सफलता का श्रेय विद्यालय संचालक विशाल सेठ और मुजफ्फर अली कम्यूनिकेशन ऑफ फाइन आर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार सलीम को जाता। क्योंकि उन्होंने उसे न सिर्फ प्रेरित किया, बल्कि तन मन और धन से स्वयं और विद्यालय की टीम को लगाया। मेरे माता, पिता, दादी और गुरुजनों ने भी उत्साहवर्धन किया, जिससे वह सफल हो सका।