स्वतंत्रता दिवस पर आजादी की आस संजोए हैं 19 कैदी
जिला कारागार में बंद बूढ़े और शरीर से कमजोर हो चुके कैदियों की आंखों में स्वतंत्रता दिवस पर रिहाई के सपने तैरने लगे हैं। यह उम्मीद उन्हें इसलिए भी है कि सरकार शायद कमजोर पड़ चुके उनके शरीर को देखते हुए रहम दिखा दे, लेकिन इस दिशा में सरकार द्वारा अभी तक कोई पहल न किए जाने से उनकी इन उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है।
वर्तमान समय में जिला जेल में 110 कैदी ऐसे हैं, जिनकी उम्र 60 से ऊपर है। इनमें से अधिकतकर कैदी हत्या, दहेज हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। बुजुर्ग कैदियों में 19 कैदी ऐसे भी हैं जो 70 से अधिक आयु के हैं। उम्र दराज होने के कारण चलने-फिरने में उन्हें काफी दिक्कत होती है। साथ ही आंखों की रोशनी भी कम हो चुकी है। उम्र के अंतिम पड़ाव के यह कैदी किस समय दम तोड़ दें, कुछ नहीं कहा जा सकता है। लंबे समय से जेल में रहने के कारण इनमें तनाव भी देखा जा रहा है। कइयों को बीमारी ने भी जकड़ रखा है, जिनका फिलहाल जेल अस्पताल से उपचार होता है, लेकिन जब हालत गंभीर होती है तो उन्हें जिला अस्पताल भेजा जाता है। 28 मार्च 17 को शासन के आदेश पर जेल प्रशासन ने 70 से अधिक उम्र के 19 कैदियों की सूची भेजी थी। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही इन कैदियों की आंखों में रिहाई के सपने तैरने लगे हैं, लेकिन सरकार द्वारा इस ओर अभी तक कोई पहल न होने से इनके सपने पूरे होते नहीं दिख रहे हैं।
बुजुर्गों पर रहम, जेल प्रशासन नहीं लेता काम
जिला जेल में बंद 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्ग कैदियों से जेल प्रशासन रहम किए हैं। उनसे कोई काम नहीं लिया जाता है। बुजुर्ग कैदियों से मिलवाने के लिए परिवार के लोग भी पंद्रह दिन पर आते हैं और मुलाकात करते हैं। जेल प्रशासन ने बुजुर्ग कैदियों के लिए एक विशेष बैरक बनाई है, जिनमें इन कैदियों को रखा जाता है। इन्हें खाने के लिए भोजन के अतिरिक्त जेल प्रशासन दूध और फल भी प्रतिदिन देता है।
जेल में 19 कैदी ऐेसे हैं, जो 70 साल के ऊपर के हैं, जिनकी सूचना चार महीने पहले शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई रिहाई संबंधी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इन्हें विशेष बैरक में रखा गया है और कोई काम नहीं लिया जाता है।
आरबी पटेल, जेल अधीक्षक