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कोहरे की चादर में लिपटा रहा शहर

Fri, 09 Dec 2016 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
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ठंड - फोटो : अमर उजाला
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शुक्रवार दिन में खिली धूप तो मिली कुछ राहत
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शहर में गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार सुबह तक घना कोहरा छाया रहा, जिससे ठंड बढ़ गई, दोपहर धूप खिली तो कुछ राहत मिली। रात में घना कोहरे के कारण यातायात भी प्रभावित रहा। 
गोला गोकर्णनाथ। दिन भर सूर्यदेव के दर्शन न होने से मौसम में गलन बढ़  गई है, जिससे लोग अपने घरों में दुबके रहे और आग तापकर दिन  गुजारा और कामकाजी लोग गर्म कपड़े पहनकर घर से निकले। सुबह के पहर कोहरा  गिरने से वाहनों को धीमी गति में लाइटें जलाकर निकलना पड़ा। रेलवे  स्टेशन पर रेल के अमान परिवर्तन को लेकर काम कर रहे श्रमिकों और उनके  बच्चों ने आग जलाकर ठंड दूर की। 
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नगर में सर्दी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर नगर पालिका ने सीएचसी, अशोक चौराहा, विकास चौराहा,  छोटा चौराहा, नानक चौकी, बस स्टेशन  सहित सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाए  हैं।
ममरी। शुक्रवार को दिन भर कोहरा  छाया रहने से और सूर्यदेव के दीदार न होने से शीतलहर का प्रकोप जारी रहा।  लोग अलाव से चिपके रहे वहीं कुछ लोग रजाइयों में दुबके रहे। सड़कों पर वाहनों की गति धीमी रही। 
 
सर्दी में भी ठंडा है गर्म कपड़ों का बाजार
लखीमपुर खीरी। सर्दी की शुरुआत होते ही गर्म कपड़ा व्यापारियों ने इस बार कारोबार अच्छा होने की उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन नोटबंदी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। नोटबंदी और बैंकों से पैसे न निकल पाने के कारण गर्म कपड़ों का कारोबार फिलहाल ठंडा है।
गत वर्ष की तुलना में गर्म कपड़ों की बिक्री इस बार घटकर चालीस प्रतिशत तक आ गई है। व्यापारियों का कहना है कि इस बार मौसम ने साथ दिया तो नोटबंदी से व्यापार गड़बड़ा गया है।
गर्म कपड़ा व्यापारी श्यामू चौरसिया का कहना है कि मौसम तो पूरा साथ दे रहा है, लेकिन नोटंबदी ने सबकुछ चौपट कर रखा है। पिछले साल जहां बीस से तीस पीस दिन भर में बिक जाते थे, लेकिन इस बार मात्र तीन-चार पीस ही बिक पा रहे हैं
कंपनी बाग के पास स्वेटर की दुकान लगाने वाले रोहित का कहना है कि इस बार बाजार मंदा है, मौसम को देखकर माल भी मंगवा लिया था, लेकिन नोटबंदी ने दुुकानदारी चौपट कर रखी है। किसी किसी दिन तो बोहनी तक के लाले पड़ जाते हैं।
व्यापारी  संजय मिश्रा का कहना है कि मौसम का रुख देखकर हर प्रकार की वैरायटी मंगवा रखी थी, लेकिन सर्द मौसम पर नोटबंदी भारी पड़ रही है। गत वर्ष जहां दुकान  पर ग्राहकों की लाइन  लगी रहती थी, आज वहीं सन्नाटा पसरा है। पिछले साल रोजाना 60 से 70 पीस की बिक्री होती थी, वह नोट बंदी के कारण सिमट कर मात्र 15 से 20 पीस ही रह गई है। भरपूर माल होने के बावजूद ग्राहकों का इंतजार रहता है
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व्यापारी अमित का कहना है कि पहले नोटबंदी ने कामकाज प्रभावति किया और अब धंधा भी चौपट कर दिया है। मौसम को देखकर लग रहा था कि इस बार धंधा अच्छा रहेगा, लेकिन नोटबंदी ने सब बेकार कर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना से बिक्री गिरकर तीस से चालीस प्रतिशत रह गई है।
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