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Lakhimpur Kheri News: आंवला वृक्ष का पूजन कर भगवान विष्णु से मांगी सुख-समृद्धि

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गोला के नगर पालिका परिषद परिसर स्थित आंवला वृक्ष की पूजा करती महिलाएं। संवाद - फोटो : 1
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गोला गोकर्णनाथ। नगर व क्षेत्र में आंवला नवमी परंपरागत ढंग से मनाई गई। महिलाओं ने आंवला के वृक्ष के तने पर धागा लपेटकर भगवान विष्णु से सुख समृद्धि और सौभाग्य की कामना की। मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में ही निवास करते हैं। इसके अलावा महिलाओं ने वृक्ष के नीचे भोजन कर वृत का पारण किया।
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सतयुग का शुभारंभ भी आंवला नवमी से ही माना जाता है। भगवान विष्णु को आंवले का फल सबसे प्रिय है। बृहस्पतिवार को महिलाओं ने उपवास रखकर नगर पालिका परिषद के परिसर में स्थित आंवले के वृक्ष का पूजन किया। वृक्ष के तने पर धागा लपेटकर, हल्दी चावल, कुमकुम, सिंदूर, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान से उसका पूजन किया।
इसके बाद भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि, सौभाग्य की कामना की। महिलाओं ने वृक्ष के नीचे भोजन कर व्रत का पारण किया। नगर पालिका की ओर से पूजन के अवसर पर तहरी भोज का आयोजन किया गया। पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने श्रद्धालु महिलाओं को शुभकामनाएं दींं।
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ममरी। आंवला नवमी के अवसर पर महिलाओं ने उपवास रखकर आंवला वृक्ष की जड़ में पकवान चढ़ाकर और आंवला के पौधे लगाकर पुत्र प्राप्ति और सुख समृद्धि की कामनाएं की।
कहा जाता है कि आदिकाल में भगवान शिव और माता पार्वती ने भी पुत्र प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक आंवला नवमी के दिन उपवास रखकर पूजन किया था। तब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से माता पार्वती के घर श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इसी परंपरा के चलते महिलाओं ने उपवास रखकर आंवला की जड़ में पूरी पकवान चढ़ाकर पूजन किया और आंवला के पौधे रोपित कर धन-धान्य, सुख समृद्धि, पुत्र प्राप्ति की कामना की।
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