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जब स्वास्थ्य केंद्र ही बीमार तो कैसे हो इलाज

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कालीचरनपुर का बदहाल एएनएम सेंटर। - फोटो : LAKHIMPUR
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गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा तंत्र दम तोड़ने लगा है। एक हजार की आबादी पर एक स्वास्थ्य उपकेंद्र और साथ ही एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाए गए थे, देखरेख के अभाव और चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते भवन जर्जर हो गए हैं। कुछ स्थानों पर स्टाफ ही नहीं है, कहीं हैं तो गिनती के कर्मचारी जो केवल मरहम पट्टी के अलावा और कुछ नहीं करते। एएनएम सेंटरों पर स्वास्थ्य वर्कर कभी कभार ही आती हैं। जर्जर भवनों में खड़ी झाड़ झंकार के बीच लोग जाने से भी कतराने लगे हैं। वहीं इन स्वास्थ्य केंद्रों के अंदर लाखों की मशीनें कबाड़ हो गई हैं। ऐसे में जब स्वास्थ्य केंद्र ही बीमार हैं तो भला बीमारों का इलाज कौन करें। यही कारण है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पताल में दिन प्रतिदिन मरीजों, तीमारदारों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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एक शताब्दी से अधिक पुराना है गोला का पीएचसी भवन
मोहम्मदी रोड स्थित पीएचसी का भवन पीलीभीत के रायबहादुर शाहू, लालता प्रसाद, शाहू हरिप्रसाद ने पेशेंट वार्ड के रूप में वर्ष 1908 में बनवाया था। एक शताब्दी से अधिक पुराना यह भवन जर्जर हो गया है। बरसात में जिस तरह पानी बाहर बरसता है उसी तरह यह इमारत टपकती है। मशीनें खराब हो चुकी हैं। जलभराव के कारण स्टाफ तक के बैठने की जगह नहीं रहती। मरीज भी आने से कतराने लगे हैं। अब यहां गिनती की ही ओपीडी होती है।
जर्जर एएनएम सेंटर पर जाने से कतराते हैं मरीज
अलीगंज रोड स्थित कालीचरनपुर गांव में 1977 में स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था जो अब देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया है। यहां तैनात एएनएम सप्ताह में एक बार ही आती हैं। जिला पंचायत के पूर्व सदस्य शिवनंदन वर्मा, प्रेमपाल वर्मा, होतीलाल वर्मा ने बताया कि जर्जर इमारत में मरीज तो आने से कतराते ही हैं, वहीं एएनएम भी यहां बैठने से डरती हैं। यदि इस सेंटर की मरम्मत विभाग करा दे तो लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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लोगों के दरवाजे पर बैठकर टीकाकरण करतीं हैं एएनएम
मूड़ा सवारान। ग्राम पंचायत भदेड़ में बना उप स्वास्थ्य केंद्र दयनीय हालत में है। यहां पर एएनएम निर्मला मिश्रा तैनात हैं, जो गांव में किसी न किसी के यहां बैठकर टीकाकरण का काम निपटाती हैं। गांव के आनंद सिंह, पवन गुप्ता, विपिन वर्मा का कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को बताया गया लेकिन आज तक मरम्मत तो दूर रंगरोगन तक नहीं हुआ।
कभी कभार ही आती हैं एएनएम
मूड़ा सवारान। ग्राम पंचायत फजलनगर ग्रंट में वर्ष 2008 में उपकेंद्र बना था। निर्माण होने के बाद यहां आज तक कोई भी एएनएम नहीं बैठी। देखरेख के अभाव में महज 12 वर्षों में ही यह भवन जर्जर हो गया। ग्रामीण राकेश यादव, चुन्नीलाल, रामदुलारे, कलीम अहमद, नफीस अहमद, सुनील शर्मा, देवनाथ यादव, ग्राम प्रधान शांति देवी आदि ने बताया कि गांव में एएनएम लक्ष्मीदेवी तैनात हैं, जो कभी कभार आकर टीकाकरण कर जाती हैं।
जर्जर भवन के कारण नहीं बैठती एएनएम
ममरी। ब्लॉक बांकेगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत रामपुर ग्रंट नंबर 18 के मजरा छत्तीपुर गांव में गर्भवती महिलाओं, बच्चों की सुविधा के लिए बना एएनएम केंद्र वर्ष 2007 से बंद पड़ा है। विभाग की अनदेखी के चलते इमारत की छत से लेकर फर्श और दीवारों तक झाड़ियां उग आई हैं। गांव के भाईलाल शर्मा, सुरेंद्र कुमार, आदित्य कुमार, मनोज, खजांची लाल आदि का कहना है कि भवन गिरताऊ होने से आंगनबाड़ी, आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं, बच्चों का टीकाकरण गांव में कैंप लगाकर करती हैं। एएनएम की नियुक्ति भी वर्ष 2007 से अब तक नहीं हुई है। सीएचसी प्रभारी डॉ. केके रंजन का कहना है कि ब्लॉक क्षेत्र में जो भी केंद्र बंद पड़े हैं, उनका जीर्णोद्धार शीघ्र ही ग्राम पंचायत निधि से कराया जाएगा, जिसके लिए प्रस्ताव पास हो चुका है। बंद पड़े एएनएम सेंटर शीघ्र चालू कराएं जाएंगे।
ब्लॉक में 24 उपकेंद्र, छह प्राथमिक अतिरिक्त केंद्र ..इनमें से अधिकतर जर्जर
गोला गोकर्णनाथ। ब्लॉक कुंभी में 24 उपकेंद्र और नगर पीएचसी कुंभी के अतिरिकत झाऊपुर, गोला, सिकंद्राबाद, परेली और सुहेला में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिसमें से अधिकतर जर्जर हो गए हैं।
उपकेंद्र और एडिशनल पीएचसी की मरम्मत के लिए प्रस्ताव जा चुके हैं। व्यवस्था सुधार का प्रयास किया जा रहा है। 24 में से 15 उपकेंद्रों की मरम्मत कराई जा चुकी है। शीघ्र ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था ठीक होगी।
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- डॉ गनेश कुमार, पीएचसी अधीक्षक
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