जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। डीपीओ, सीडीपीओ और मुख्य सेविकाओं के निरीक्षण में केंद्रों पर ढेरों कमियां पाई गई हैं। इन केंद्रों पर बच्चों की संख्या अधिक दर्ज कर पोषाहार में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, जबकि बच्चों की उपस्थिति आधे से भी कम मिली हैं। डीपीओ ने इस मामले में 467 केंद्रों की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही कार्यकत्रियों के वेतन से 25 फीसदी पोषाहार के मूल्य की रिकवरी का निर्देश दिया है।
शासन के निर्देश के बाद एक अगस्त से जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। कुल 3503 में से अब तक 504 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। जिनमें डीपीओ अखिलेंद्र दुबे ने 17, जिले की नौ सीडीपीओ ने 152 और 57 मुख्य सेविकाओं ने 335 केंद्रों का हाल देखा है। डीपीओ के मुताबिक निरीक्षण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर तमाम खामियां मिली हैं। विभाग द्वारा दिए गए खिलौने बच्चों को नहीं दिए जा रहे हैं और न ही केंद्रों पर खिलौने मिले हैं। केंद्रों पर बोर्ड नहीं लगे हैं और न ही ग्रोथ चार्ट ही पूरे किए गए हैं। सबसे बड़ी कमी यह मिली है कि केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति कम है, लेकिन रजिस्टर में उनकी संख्या दोगुनी है। बाल विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा केंद्रों पर रजिस्टर में दर्ज बच्चों की संख्या के मुताबिक ही पोषाहार दिया जा रहा है। डीपीओ का कहना है कि निरीक्षण में केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति आधी मिल रही है। इससे स्पष्ट है कि कार्यकत्रियों द्वारा फर्जी रूप से पोषाहार और हाटकुक्ड सामग्री खारिज कर योजनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे लाभार्थी के हित का हनन हो रहा है, जो कि अपराध की श्रेणी में आता है और आपत्तिजनक भी है। डीपीओ ने यह भी कहा कि कार्यकत्रियों द्वारा पंजीकृत लाभार्थियों का 50 प्रतिशत की औसत उपस्थिति को आधार मानकर पोषाहार एवं हाटकुक्ड का मांग पत्र दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर भारी अनियमितता मिलने पर डीपीओ ने सीडीपीओ को निर्देश दिया है कि वे कार्यकत्रियों को नोटिस जारी कर 25 फीसदी पोषाहार और हाटकुक्ड की धनराशि की वसूली की कार्रवाई कराएं। डीपीओ ने ऐसा न करने पर संबंधित सीडीपीओ के खिलाफ भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।