गन्ना भुगतान का मामला पटरी पर नहीं आ रहा है और इसको लेकर चीनी मिल अधिकारियों से हुई किसान नेताओं की वार्ता बेनतीजा हो गई, जिसके बाद किसानों ने पूरी तरह मिल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है। यह आंदोलन एक महापंचायत के बाद होगा। किसानों ने चीनी मिल प्रबंधन पर वायदे से मुकरने का इल्जाम लगाया है।
पलिया चीनी मिल ने पेराई सत्र शुरू होने के बाद किसानों ने कतई गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया। इसको लेकर किसानों में सुगबुगाहट शुरू हुई और फिर भुगतान न होता देख किसानों ने चीनी मिल में महापंचायत की और इसमें मिल के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। जिससे प्रशासन में हड़कंप मचा और एसडीएम आलोक वर्मा महापंचायत में पहुंच गए। उन्होंने यहां किसानों की बात को सुना और चीनी मिल अधिकारियों को बुलाया। जिसमें जीएम केन वहां पहुंचे तब एसडीएम ने सख्त लहजे में उनसे भुगतान की स्थिति के बारे में पूछा।
इसके बाद उन्होंने किसानों को भुगतान कराने के निर्देश दिए और मिल अधिकारी ने इस पर तीन से चार दिन का भुगतान शुक्रवार को कराने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही एसडीएम ने किसानों की मांग पर तय कराया कि आने वाले एक-दो दिन में किसानों की बैठक मिल अधिकारियों के साथ होगी और इस बैठक में चीनी मिल अधिकारी प्रत्येक सप्ताह तोले गए गन्ने में चार से पांच दिन का भुगतान सुनिश्चित कराएंगे।
चीनी मिल ने वायदे के तहत शनिवार को किसानों के खाते में करीब पांच करोड़ रुपये की एडवाइज भेज दी लेकिन प्रत्येक सप्ताह में अधिकतम भुगतान का रास्ता साफ नहीं हो पाया। इसके तहत सोमवार को सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष विकास कपूर विक्की, उपाध्यक्ष फरजंद अली बुंदू मियां, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के विधानसभा अध्यक्ष मनप्रीत सिंह, उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह सोनी, सुनील गुप्ता, नईयरूल इस्लाम खान, सुहेल खान, सहकारी गन्ना विकास समिति भीरा के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह आदि का प्रतिनिधि मंडल चीनी मिल पहुंचा। किसान नेताओं ने यहां अधिकारियों से कहा कि उनकी मांग है कि हर सप्ताह पांच दिन का भुगतान किया जाए।
इस मांग पर अधिकारियों का कहना था कि वे दो दिन का ही भुगतान भेज सकते हैं। इस पर किसान सहमत नहीं हुए और वार्ता बेनतीजा ही रह गई। किसानों ने तय किया है कि वे महापंचायत करके आंदोलन करेंगे।