स्थानीय कवियों ने बिखेरे विविध विधाओं के रंग
देर रात तक चला कविता और शेरों शायरी का दौर, साहित्य एवं काव्य प्रेमी हुए निहाल
गोला गोकर्णनाथ। चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर स्थानीय कवियों एवं शायरों ने अलग-अलग विधाओं के रंग बिखेरे। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने नगर की काव्य और साहित्य प्रतिभाओं को सम्मानित किया। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल और कवियों ने दीप जलाकर स्थानीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का शुभारंभ कराया। गीतकार एवं कवि रमेश पांडे शिखर शलभ ने वाणी वंदना कर कवि सम्मेलन की शुरुआत कराई।
इस दौरान मधुकर शैदाई ने पढ़ा कि ‘इस धरती पर पैदा होना बड़े गौरव की बात है। साहस, शौर्य, एकता अपने पुरखों की सौगात है’। द्वारिका प्रसाद रस्तोगी ने प्रेम पर कहा कि ‘प्रेम शाश्वत सत्य है अमरत्व की अभिलाष है, कृष्ण राधा मिलन का मधुर सा एहसास है’। सुधीर अवस्थी ने देश के हालातों पर कहा- देश का कैसे हो उद्धार, पग-पग बैठे पालनहार कुर्सी पर गद्दार। अजमुद्दीन ने शेर पढ़ा- नाटक हम मोहब्बत का कभी भी नहीं करते। सबकी अदाओं पर ऐसे हम भी नहीं मरते। बेदिल भारती ने कहा- शिद्दत ए जुल्मों सितम के खौफ से, सच न बोलूं झूठ से डर जाऊं क्या। संचालन करते हुए डॉ. वेद प्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि ‘कभी विश्वास छलता है तो कविता बोल उठती है। गला जब न्याय का घुटता है तो कविता बोल उठती है’।
सम्मेलन में श्रीकांत तिवारी, संत कुमार बाजपेई, नंदलाल निराश, बेनी राम अनजान, गेंदनलाल कनौजिया, मुरलीधर त्रिपाठी, आलोक तिवारी, सुरेश चंद्र सक्सेना, शिप्रा खरे आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर नगर पालिका के सदस्य एवं कर्मचारी और साहित्य काव्य प्रेमी मौजूद रहे।