पलिया के दौलतपुर में बाढ़ बचाव कार्य की स्थिति। संवाद
पलियाकलां। गांव दौलतापुर में शारदा नदी किनारे कराए जा रहे 1308 मीटर लंबे एंटी एरोजन वर्क (कटाव निरोध कार्य) की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कटाव रोकने के लिए सीमेंट की बोरियों में मिट्टी भरकर उन्हें बंधे की तरह लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि तेज बहाव आने पर यह कार्य बह सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले भी सिंचाई विभाग ने इसी स्थान पर कटावरोधी कार्य कराया था, लेकिन तीन बार पानी आने के बाद नदी किनारे बनाया गया बचाव कार्य क्षतिग्रस्त होने लगा। उनका आरोप है कि उस समय केवल एक-एक जाल बिछाकर मिट्टी के ठोकर बनाए गए थे, जो तीसरी बार पानी बढ़ने पर बैठ गए और कटाव शुरू हो गया। अब भी उसी प्रकार का कार्य किया जा रहा है, जिससे बाढ़ आने पर जाल और मिट्टी की बोरियां बहने की आशंका है।
ग्रामीणों ने मांग की कि कटाव रोकने के लिए मानकों के अनुरूप मजबूत निर्माण कराया जाए, ताकि गांव और कृषि भूमि सुरक्षित रह सके। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग की है।
सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर कुंदन लाल ने बताया कि यह बंधा निर्माण नहीं, बल्कि एंटी एरोजन वर्क (कटाव निरोध कार्य) है। इसका उद्देश्य नदी के कटाव और बाढ़ के पानी से होने वाले नुकसान को रोकना है। कार्य विभागीय मानकों के अनुसार कराया जा रहा है।