बाग में इमली पक्ष के लोग
- फोटो : संवाद
क्या है परंपरा
गांव भेरमपुर निवासी जगन्नाथ प्रसाद यादव बताते हैं कि सन 1960 में गांव निवासी खुशीराम यादव के कुआं का विवाह इमली के संग हुआ था। इसके बाद साल 1995 में यह परंपरा फिर निभाई गई। बाद में खुशीराम यादव के पुत्रों के बंटवारे में कुआं एक पुत्र के हिस्से में आ गया था। बाग में इमली का पेड़ दीमक लगने से खत्म हो गया था। इससे परिवार के लोगों को विवाह की रस्म पूरी करने में दिक्कत होती थी।
लोक परंपरा के अनुसार विवाह में उस कुएं का पूजन कराया जाता है, जिसका इमली के साथ विवाह कराया गया हो। ऐसे में साल 2024 में इमली पौधा आम के बाग में लगाकर गांव के चौराहे पर स्थित कुआं से शादी करने का निर्णय लिया था। परंपरा के अनुसार महिलाओं ने बुधवार को छेई, बृहस्पतिवार को रतिजगा, शुक्रवार को तेल पूजन, रविवार को आम बाग में इमली का विवाह कुआं संग कराया गया। इस मौके पर गांव के वीरेंद्र कुमार यादव, अवधेश कुमार यादव, राकेश यदुवंशी, परमानन्द कश्यप, कुलदीप कुमार, गोपाल, रोहन कश्यप समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
संबंधित वीडियो