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बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुसीबतें

Wed, 15 Apr 2015 07:52 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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मौसम के बदलते मिजाज से एक तरफ जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है वहीं मौसम के रुख को देखकर किसानों के माथे पर पसीना आ रहा है। मार्च अप्रैल में तेज हवाओं के साथ बारिश से खेतों में तबाह हुई फसल अब खलिहानों में बर्बाद हो रही है। पिछले तीन दिनों से आसमान में छाए बादल किसानों को डरा रहे हैं। बुधवार को सुबह से आसमान में बादल छाए रहे। कुछ देर के लिए जिले के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है हालांकि शहर में महज बूंदाबांदी हुई।
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आसमान में बादल छाए रहने और बारिश होने से मौसम खुशनुमा हो गया। तापमान में गिरावट महसूस की गई। बुधवार को अधिकतम तापमान 26.8 और न्यूनतम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। बीच-बीच में कुछ देर के लिए घूप निकली लेकिन जल्दी ही बादलों ने सूरज को अपनी ओट में छिपा लिया।
बुधवार को सुबह हुई बारिश से खेतों में कटी पड़ी और कट रही गेहूं की फसल भीग कर बर्बाद हो गई। किसान अपनी बची खुची फसल को जल्दी-जल्दी घर लाकर ठिकाने लगाने की फिराक में है लेकिन मौसम उसे मौका ही नहीं दे रहा है। पहले खेतों में फसल बर्बाद हुई अब खलिहानों में फसल खराब हो रही है।
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निघासन के किसान रामदयाल का कहना है कि बारिश ने इस बार उनका सब कुछ लूट लिया है। बारिश में बाढ़ और अब इस बेमौसम बारिश ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा। बांकेगंज के रामजीवन कहते हैं कि पहले हुई बारिश से खेतों में तैयार खड़ी फसल खेतों में ही बिछ गई। किसी तरह उसे काट कर बाहर लाए तो खलिहान में आकर भीग गई। अब इससे दूसरे खर्चे तो दूर खाने तक के लाले पड़ने की नौबत आ गई है। राम प्रसाद, मनोहर लाल, राम सनेही आदि का भी कुछ यही कहना है।
बांकेगंज। बुधवार को सुबह आठ बजे तेज हवाओं के साथ हुई बूंदाबांदी से खेतों में कटी पड़ी गेहूं फसल भीगने से मड़ाई का काम प्रभावित रहा। बेमौसम बारिश से किसानों को 30 प्रतिशत से भी अधिक नुकसान हो चुका है। उर्द, मूंग, मसूर, लाही की फसलों को भी नुकसान हुआ है। क्षेत्रीय किसानों प्रेम सिंह, वीरेंद्र्र पाल सिंह, कृष्ण कुमार दिवाकर आदि ने बताया कि  आंधी और बूंदाबांदी से खेतों में कटी पड़ी फसल उठाने में दिक्कत पैदा होने से मड़ाई में बाधा आई है।
ममरी। बुधवार सुबह बारिश होने से किसानों के खेतों में मड़ाई के लिए कटी पड़ी और खड़ी गेहूं की फसल भीगकर गीली हो गई। गेहूं की अगैती फसल और लाही, मसूर मौसम की मार से पहले ही नष्ट हो चुकी है। बची गेहूं की पिछैती फसल अब भीगकर बर्बाद हो गई है। खेतों में कंबाइन मशीन भी नहीं चल पा रही है।
मैलानी। मौसम का कहर झेल रहे किसान मौसम का रुख देखकर एकबार फिर चिंतित हो उठे हैं, क्योंकि बची-खुची फसल अभी भी खेतों में ही खड़ी है। फसल काटने के लिए कंबाइन मशीनों की किल्लत किसानों के माथे की शिकन और बढ़ा रही है।

ईंट-भट्ठा स्वामियों की धड़कने तेज
बार-बार हो रही बारिश से भट्ठा स्वामियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पाथी गई कर्च्ची इंटें पानी में भीग कर गल गई हैं। इससे भराई और फुं काई न हो पाने से ईंट निर्माण भी ठप होने की कगार पर है। ईंटों के रेट बढ़ जाने से अब भवन निर्माण भी महंगा होने की आशंका है। भट्ठों पर बारिश के चलते पथाई आदि कार्य बंद होने से मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट है।
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