आलोक बोले- काफी परेशानी के बाद छह दिन बाद पहुंच सका हूं स्वदेश
संपूर्णानगर के नबील भी लौटे, दिल्ली में परिजन ने किया गले लगकर स्वागत
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन के अडेसा में फंसे मोहम्मदी के छात्र आलोक सिंह की बुधवार देर रात दो बजे घर वापसी हो गई, जिससे परिजन समेत गांव में जश्न का माहौल है। आलोक 26 फरवरी को अडेसा से चले थे। हंगरी बॉर्डर होते हुए छह दिन के अंदर उनकी स्वदेश वापसी हुई है। वहीं संपूर्णानगर के नबील अहमद भी स्वदेश लौट आए हैं। दिल्ली पहुंचे परिजन ने गले मिलकर उनका स्वागत किया।
मोहम्मदी के आलोक सिंह जहां बुधवार देर रात दो बजे अपने घर पहुंच गए, वहीं संपूर्णानगर के नबील अहमद भी दिल्ली में अपने परिवार के पास पहुंच गए। मोहम्मदी के अनुराग यादव और खजुरिया के अब्दुल मन्नान जहां रोमानिया में बुखारेस्ट एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में हैं तो पलिया के शिवम सिंह रोमानिया बॉर्डर पर हैं। लखीमपुर के छत्रपाल, मनमोहन और कृष्णमोहन मिश्रा पोलैंड एयरपोर्ट पर हैं। मोहम्मदी के सरवन सिंह, रिशम जीत कौर जहां हंगरी बॉर्डर के पास रुके हुए हैं। वहीं मोहम्मदी के सुकांत मंडल और खीरी टाउन की उम्मी खातून हंगरी पहुंच चुकी हैं, जबकि पलिया के ऋषभ गोयल स्लोवाकिया में हैं। मोहम्मदी के हर्षित यादव अकेले यूक्रेन के खार्कीव बॉर्डर के शेल्टर होम में है, जबकि पांच छात्रों लखीमपुर के अमन प्रताप सिंह, ईशना वर्मा, मंताशा खान, लौकिहा के जावेद खान और कुकरा के मोहम्मद उबाश से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
वहीं, यूक्रेन संकट को देखते हुए समय रहते ही भीरा क्षेत्र के कुशाल मिश्रा 17 फरवरी को, मोहम्मदी के अंकुर राठौर 19 फरवरी को और लखीमपुर तहसील के कुश रस्तोगी 23 फरवरी को ही सकुशल अपने घर पहुंच चुके थे।
जिला प्रशासन ने दी 23 विद्यार्थियों के बारे में जानकारी
इस मामले में जिला प्रशासन ने कुल 23 छात्रों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दो छात्र सकुशल घर पहुंच गए हैं, जबकि 12 छात्र यूक्रेन से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। सिर्फ एक छात्र अभी यूक्रेन के शेल्टर होम में है। पांच छात्रों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस बीच तीन छात्रों के 23 फरवरी से पहले ही घर पहुंचने की जानकारी मिली है।
पलिया के दो छात्रों के परिवारों में लौटी खुशी
पलिया/संपूर्णानगर। यूक्रेन में फंसे पलिया तहसील क्षेत्र के दो छात्रों के परिवारों के लिए खुशी की खबर है जबकि दो परिवारों के बच्चे अभी भी बार्डरों पर फंसे होकर भारत लौटने की आस लगाए हुए हैं। संपूर्णानगर के नबील अहमद अपने दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच चुके हैं। जिसके बाद परिजन में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं पलिया के ऋषभ गोयल भी आज घर पहुंच सकते हैं।
पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल स्लोवाकिया बार्डर पर दो दिनों से आकर रुके थे। यहां भारतीय दूतावास की तरफ से उनको होटल में ठहराया गया था। पिता मुकेश गोयल ने बताया कि सुबह बेटे से बात हुई थी तो पासपोर्ट जमा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही थी। दोपहर बाद फोन किया तो पता चला कि देर रात भारत आ रही फ्लाइट से उनका बेटा भी भारत अपनी सरजमीं पर लौट रहा है, जिससे परिजन काफी खुश हैं और भारत सरकार का शुक्रिया कर रहे हैं।
संपूर्णानगर के छात्र नबील अहमद खान भी दो दिनों से पोलैंड बार्डर पर फंसे हुए थे। बृहस्पतिवार को सुबह वह भारत पहुंचे और दिल्ली एयरपोर्ट पर कागजी कार्रवाई के बाद अपने दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए हैं। नबील के चचेरे भाई ने बताया कि मीडिया और भारत सरकार की मेहनत के चलते उनका भाई भारत आ गया है। जिस पर नबील के पिता अबरार अहमद खान व अन्य परिजन ने उसको गुलदस्ता भेंट कर स्वागत करने के साथ मिठाई खिलाकर खुशी जताई है।
गोविंदनगर के छात्र शिवम सिंह के पिता ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि तीन दिनों से उनका बेटा रोमानिया बार्डर पर फंसा हुआ है। भारतीय दूतावास ने भी कोई संपर्क नहीं किया है। कांग्रेस के महासचिव व पूर्व सांसद पुत्र सैफ अली नकवी ने हालांकि पुत्र से बात की है और भारतीय दूतावास में भी शिवम का नाम नोट कराया है। अभी बेटा रोमानिया बार्डर स्थित सेंटर पर है लेकिन उस तक कोई मदद नहीं पहुंच पा रही है। जिससे अब वह किस तरह से भारत आएगा इसको सोंचते हुए परिजन काफी परेशान हैं।
खजुरिया के बकरीदन अंसारी के पुत्र अब्दुल मन्नान अंसारी भी रोमानिया बार्डर पर फंसे हैं। पिता बकरीदन ने बताया कि बेटा सुरक्षित तो है लेकिन भारत आने की उसकी राह आसान नहीं लग रही है। बीते दो दिनों बार्डर पर फंसा है आसपास के इलाके में ब्लास्ट भी हो रहे हैं जिससे डर बना हुआ है। भारतीय दूतावास की तरफ से पासपोर्ट भी जमा कर लिया गया है लेकिन अभी तक उसको भारत की फ्लाइट से नहीं भेजा जा रहा है। जिससे उसके साथ ही अन्य कई भारतीय छात्र बार्डर पर फंसे हैं। मीडिया और भारत सरकार से गुजारिश है कि पुत्र को सही सलामत भारत पहुंचाए।