लखीमपुर खीरी। अपहरण और दुष्कर्म समेत अन्य आरोपों के 18 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी (न्यू) भूलेराम ने दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
कोतवाली सदर में वर्ष 2008 में दर्ज मुकदमे में धोबहा निवासी सलीम और उसके साले मोहम्मद शरीफ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376 के तहत आरोप थे। तीसरे आरोपी मोहम्मद यूसुफ की विचारण के दौरान मृत्यु हो जाने पर उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
अदालत के निर्णय के अनुसार, घटना एक फरवरी 2008 की थी, जबकि प्राथमिकी 22 फरवरी 2008 को दर्ज कराई गई। रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। मुकदमे के वादी ने पीड़िता को आरोपी के साथ जाते हुए नहीं देखा था। विवेचना के दौरान पीड़िता लखीमपुर रोडवेज बस स्टैंड से अकेले बरामद हुई थी।
निर्णय में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, पीड़िता ने अपने बयान में सलीम के साथ अपनी इच्छा से जाने और उसके घर रहने की बात कही थी। चिकित्सीय रिपोर्ट में उसकी उम्र 18 वर्ष पाई गई। अभियोजन के गवाह रईस अहमद ने भी मुख्य बयान में अभियोजन के कथानक का समर्थन नहीं किया, जिसके बाद उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया।
इन परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 23 अक्तूबर 2026 को सलीम और मोहम्मद शरीफ को संबंधित आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।