पसगवां ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मड़वा के बच्चों के दूध पीने से बीमार होने के बाद प्रशासन अब इस मामले को दबाने में जुट गया है। गुरुवार को मौके पर पहुंची डीएम किंजल सिंह ने कहा कि दूध उबालने के लिए बर्तन नहीं था, इससे दूध संक्रमित हो गया और यही दूध पीने के कारण बच्चे बीमार पड़े थे। हालांकि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जब दूध सही था तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चे कैसे बीमार पड़ गए। इस घटना से इस नई व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विद्यालयों में दूध की उपलब्धता को लेकर प्रशासन ने अब तक कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई है और न ही इस संबंध में कोई गाइड लाइन जारी की है। दूध की जांच की भी कोई तैयारी नहीं की गई है।
मिड-डे मील में बुधवार के मेन्यू कढ़ी चावल या खीर में बदलाव करते हुए शासन ने कोफ्ता-चावल और 200 मिली उबला दूध बच्चों को देने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत जिले के करीब 3949 स्कूलों में बुधवार को पहली बार दूध वितरित किया गया। लिहाजा बच्चों के साथ ही अभिभावक और प्रशासन में उत्साह था। पसगवां ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मड़वा में पहले दिन ही दूध पीकर 18 बच्चे और तीन रसोइया बीमार हो गए, जिसके बाद शिक्षा विभाग समेत आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अफसर इस मामले को दबाने के प्रयास में जुट गए। दूध का नमूना भी जांच के लिए नहीं भेजा गया और दूध के रख-रखाव संबंधी व्यवस्था सही न होने की बात कही जाने लगी।
गुरुवार की सुबह डीएम किंजल सिंह, सीडीओ नितीश कुमार, बीएसए डॉ. ओपी राय, एसडीएम नागेंद्र कुमार सिंह समेत तमाम अफसर मामले की जांच करने प्राथमिक विद्यालय मड़वा पहुंचे। डीएम ने पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों से बात की। डीएम ने बच्चों से खाने की गुणवत्ता के बारे में पूछा, उन्होंने यह भी पूछा कि दूध पीने के लिए ग्लास स्कूल से मिला था या घर से लाए थे। डीएम ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि बच्चों को अच्छा दूध और भोजन दिया जाएगा। डीएम ने स्कूल की रसोई देखी, जहां सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी। बर्तन भी अपर्याप्त थे, दो भगोनों से काम चलाया जा रहा था। दूध उबालने के लिए भगोना नहीं था। इस दौरान उन्होंने इस बात की पड़ताल नहीं कि जो दूध दिया गया था उसकी गुणवत्ता कैसी थी और उसकी जांच की गई या नहीं।
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डीएम बोलीं, दूध गर्म करने के लिए बर्तन ही नहीं था
स्कूल में दो ही भगोने थे। एक में कोफ्ता रखा गया, जबकि दूसरे में चावल। डीएम का मानना है कि दूध गर्म करने के लिए बर्तन न होने के कारण या तो उसे गर्म ही नहीं किया गया या फिर पतीले में गर्म करके बाल्टी में डाला गया। दोनों ही स्थिति में दूध के संक्रमित होने की पूरी गुंजाइश है।
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बच्चों की हालत खतरे से बाहर
चिकित्सकों ने बच्चों की हालत खतरे से बाहर बताई है। गुरुवार को स्कूल का माहौल बदला हुआ था। स्कूल के इंचार्ज प्रधानाध्यापक दृगवेंद्र सिंह यादव के निलंबन के बाद यहां का चार्ज जमिरहा के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार ने संभाल लिया।
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डीएम का आदेश, भोजन से एक घंटे पहले दिया जाए दूध
लखीमपुर। डीएम किंजल सिंह ने कहा है कि डॉक्टरों के अनुसार भोजन करने के बाद दूध पीने से एसीडिटी होती है। बच्चों को खाने के साथ अथवा बाद में दूध नहीं दिया जाना चाहिए, इसलिए एमडीएम मेन्यू में हर बुधवार को सुबह करीब नौ बजे से पहले हर बच्चे को 200 ग्राम दूध दिया जाएगा। इसके एक घंटे बाद यानी 10 बजे कोफ्ता चावल दिया जाएगा। यह निर्देश सभी प्रधानाध्यापकों तक शीघ्र पहुंचाया जा रहा है।
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दोबारा न हो ऐसी घटना
ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए समुचित प्रयास किए जाएंगे। बच्चों के लिए ग्लासों की व्यवस्था स्कूल को करने के आदेश दिए गए हैं। मिड-डे मील वितरण के समय गांव की महिला पंचायत सदस्य को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। गांव के ग्वालों से दूध लिए जाने के लिए कहा गया है। बीएसए और सीएमओ को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि दूध संक्रमित न हो।
किंजल सिंह, डीएम
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दूध उबालने और रखने के लिए पहले ही विद्यालयों को आवश्यक बर्तन खरीदने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई विद्यालयों ने इस पर अमल नहीं किया। अब फिर से निर्देश जारी किए गए हैं। दूध के लिए भगोना, बच्चों के लिए ग्लास और थाली खरीदने के लिए विद्यालय विकास अनुदान मद से आवश्यकतानुसार धनराशि खर्च करने की छूट दी गई हैै। विद्यालय प्रबंध समिति की उपस्थिति में एमडीएम/दूध वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. ओपी राय, बीएसए