उन्होंने कहा कि ऐसे में उन्हें गलत ढंग से फंसाया जा रहा है। अभियोजन की ओर से इकट्ठे किए गए सबूतों में अधिक से अधिक यह तथ्य निकल के आया एक थार गाड़ी मौके पर थी। यह थार गाड़ी आशीष मिश्र मोनू की बताई गई गई लेकिन एआरटीओ की रिपोर्ट आशीष मिश्र मोनू को थार की गाड़ी का मालिक न होने की बात कह रही है। इसके अलावा केस में वादी मुकदमा मौके पर नहीं था। जिन चोटिल गवाहों को स्टार विटनेस के रूप में प्रचारित किया जा रहा है उनके बयान भी आशीष मिश्र मोनू की मौके पर मौजूदगी का कोई सबूत दे पा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सबूतों और बयानों पर उत्पन्न विरोधाभास को सामने रखा गया। वहीं दिनभर चली सुनवाई के बाद शाम तक बहस पूरी नहीं हो सकी थी। इसके बाद अदालत ने 12 जुलाई की तारीख तय की है। बुधवार की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह के अलावा अंकित दास, सत्यम त्रिपाठी, लतीफ काले नंदन सिंह बिष्ट के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़, चंद्र मोहन सिंह, अनिल त्रिवेदी राम आशीष मिश्र मौजूद रहे। वादी की ओर से डीजीसी अरविंद त्रिपाठी और वादी के व्यक्तिगत अधिवक्ता सुरेश सिंह मुन्ना, विनय सिंह और शिव सहाय सिंह मौजूद रहे।