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तिकुनिया कांड : आज अदालत में पेश होंगे आशीष मिश्र सहित 13 आरोेपी

सार

जांच एजेंसी ने तिकुनिया कांड को बताया हत्या की सोची समझी साजिश
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प्रतीकात्मक
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विस्तार
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किसानों की ओर से लिखाई गई थी 219 नंबर की एफआईआर
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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड में तीन महीने बाद बड़ा फेरबदल सामने आया है। जांच टीम ने मामले में नई धाराएं बढ़ाते हुए मामले को दुर्घटना का नहीं, बल्कि सोची समझी हत्या की साजिश बताया है। मामले में 219 नंबर एफआईआर के सभी 13 आरोपी आज अदालत के सामने पेश होंगे।
एसआईटी की ओर से विवेचक विद्याराम दिवाकर की ओर से धाराओं में तब्दीली के लिए दी गई रिपोर्ट के बाद सीजेएम चिंताराम ने भी इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने जेल में बंद हत्यारोपियों पर बदली हुई धाराओं के तहत केस चलाने की मंजूरी के लिए आशीष मिश्र मोनू, और अंकित दास सहित सभी 13 आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के लिए अधीक्षक जिला जेल खीरी को आदेशित किया है।
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तो जमानत प्रार्थना पत्रों पर भी पडेगा असर
एसआईटी की ओर से जांच में बडे़ बदलाव के बाद जमानत प्रार्थना पत्रों पर भी इस फेरबदल का असर पडे़गा। क्योंकि आशीष मिश्र मोनू, लवकुश राना, आशीष पांडेय, रिंकू राना सहित छह लोगों की जमानतें जिला जज की अदालत से खारिज हो चुकी हैं, जिनमें पुरानी धाराएं ही थीं उन जमानत प्रार्थना पत्रों में न तो 307, 34, 326 की धाराएं थीं। इसलिए इन जमानत प्रार्थना पत्रों के निस्तारण आदेश में भी इन धाराओं का जिक्र नहीं है। इसलिए अब नए सिरे से जमानत प्रार्थना पत्र फिर से पेश करना होगा, नहीं तो भले ही हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो जाएगी फिर भी आरोपियों को नई धाराओं में तब्दीली के कारण रिहाई नहीं मिल सकेगी।

दुर्घटना होने जानलेवा हमले की साजिश धाराएं बढ़ीं
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र उर्फ मोनू की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जांच टीम ने नई धाराएं बढ़ाते हुए मामले को दुर्घटना का मामला नहीं बल्कि हत्या की सोची समझी साजिश बताया है। इस संबंध में मंगलवार को सीजेएम कोर्ट के सामने 13 आरोपी पेश होंगे।
 वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने बताया कि अब तक विशेष जांच दल ने एक्सीडेंटल केस के साथ ही विकल्प के रूप में हत्या की धाराओं के साथ मैदान में थी। यादव के मुताबिक सोमवार को एसआईटी से जुडे़ मुख्य विवेचक विद्याराम दिवाकर ने अदालत में साफ कर दिया कि बारीकी से जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि लापरवाही और उपेक्षापूर्वक गाड़ी चलाते हुए मृत्यु कारित करने का दुघर्टना का मामला नहीं है, बल्कि सोची समझी साजिश के चलते भीड़ को कुचलने, हत्या करने और हत्या के प्रयत्न के साथ ही अंग-भंग करने की साजिश का मामला है। इसलिए केस को बदलते हुए हत्या और हत्या के प्रयास के साथ ही अंग भंग करने की धाराएं लगाई जानी चाहिए। साथ ही विवेचक ने अपनी रिपोर्ट देते हुए बताया कि एक्सीडेंटल केस से जुड़ी धाराओं को हटाया जा रहा है। एकराय होकर जानलेवा हमला करने और अंगभंग करने की धाराएं बढ़ाई जाती हैं।

यह है मामला
तीन अक्तूबर को हुए तिकुनिया कांड में चार किसानों समेत आठ लोग मारे गए थे। तीन अक्तूबर की रात में ही तिकुनिया थाने में किसानों की ओर से दर्ज कराई 219 नंबर एफआईआर में आशीष मिश्र समेत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं चार अक्तूबर की सुबह सदर थाने में 220 नंबर एफआईआर में भाजपा पार्षद सुमित जायसवाल ने अज्ञात किसानों पर मुकदमा दर्ज कराया था। अब तक 219 नंबर एफआईआर मामले में आशीष मिश्र मोनू, अंकित दास, सुमित जायसवाल, लतीफ, नंदन सिंह बिष्ट, सत्यम त्रिपाठी, शिशुपाल समेत 13 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं 220 नंबर एफआईआर में विचित्र सिंह, गुरविंदर सिंह समेत चार किसानों की गिरफ्तारी हुई है।
तो जमानत प्रार्थना पत्रों पर भी पडेगा असर
एसआईटी की ओर से जांच में बडे़ बदलाव के बाद जमानत प्रार्थना पत्रों पर भी इस फेरबदल का असर पडे़गा। आशीष मिश्र मोनू, लवकुश राना, आशीष पांडेय, रिंकू राना सहित छह लोगों की जमानतें जिला जज की अदालत से खारिज हो चुकी हैं, जिनमें पुरानी धाराएं ही थीं उन जमानत प्रार्थना पत्रों में न तो 307, 34, 326 की धाराएं थीं। इसलिए इन जमानत प्रार्थना पत्रों के निस्तारण आदेश में भी इन धाराओं का जिक्र नहीं है। इसलिए अब नए सिरे से जमानत प्रार्थना पत्र फिर से पेश करना होगा, नहीं तो भले ही हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो जाएगी फिर भी आरोपियों को नई धाराओं में तब्दीली के कारण रिहाई नहीं मिल सकेगी।

धाराओं में बदलाव से अभियोजन केस को मिलेगी मजबूती
इस बदलाव के बाद बचाव पक्ष के लिए मुश्किलें बढे़ंगी तो अभियोजन टीम को मजबूती मिलेगी, क्योंकि अब तक हरेक अवसर पर बचाव पक्ष की ओर से दलीलें दी जाती थीं कि जांच करने वाली एजेंसी खुद ही तेजी और उतावलेपन से वाहन संचालन करने की बात कहते हुए दुघर्टना मृत्यु की बात कह रही है। दुघर्टना की साजिश नहीं हो सकती है। जांच एजेंसी किसी निश्चित बिंदु पर नहीं है। अभियोजन टीम खुद असमंजस में है कि आरोपियों ने कौन सा अपराध किया है। एक्सीडेंट का या जानबूझकर हत्या करने का अपराध किया है।  विवेचक विद्याराम दिवाकर की ओर से की गई जांच में तब्दीली के बाद अब अभियोजन केस एकदम स्पष्ट हो चुका है कि मामला हत्या और हत्या के प्रयास का है। एक साजिश रचते हुए गाड़ी चढ़ाकर मार डालने और मार डालने का प्रयास करने और अंग भंग करने की एकराय होकर यह हमला किया गया था, जिसे लेकर अब कोई शक या संदेह नहीं है कि यह घटना अकस्मात नहीं थी, बल्कि सोची समझी साजिश है।
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एसआईटी की जांच में विवेचक विद्याराम दिवाकर ने पाया है कि तेजी और उतावलेपन से वाहन संचालन किए जाने संबंधी कोई साक्ष्य नहीं मिला है, बल्कि साजिश बनाते हुए एक राय होकर भीड़ पर वाहन चलाते हुए हत्या जानलेवा हमला और सामान्य से अंग-भंग करने संबंधी अपराध पाया गया है, इसलिए विवेचक ने कोर्ट में धारा तब्दीली के लिए अर्जी दाखिल की है।
- एसपी यादव, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी

 
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