गोरखपुर जू में मैलानी जंगल की बाघिन। स्त्रोत-वन विभाग।
- फोटो : स्वदेशी मेेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम सुनते लोग।
बांकेगंज (खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजाेन मैलानी रेंज से करीब 15 साल पहले पकड़ी गई बाघिन को मोतियाबिंद हो गया है। उसकी दोनों आंख 90 फीसदी तक खराब हो चुकी हैं। इसकी पुष्टि गोरखपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने की है।
यहां से पकड़े जाने के बाद बाघिन को गोरखपुर जू भेजा गया था। इससे पहले उसे बर्ड फ्लू हुआ था, जो इलाज के बाद ठीक हो गया। डॉ. योगेश ने बताया कि अब जानवर भी इंसानों जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बदलते खानपान, सीमित गतिविधियों और कृत्रिम माहौल में इन वन्यजीवों में अब तमाम बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जो केवल इंसानों में पाई जाती हैं।
बाघिन को मोतियाबिंद तो एक तेंदुए को डायबिटीज हो गया है। दोनों का इलाज चल रहा है। कैंसरग्रस्त एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। हाल ही में चिड़ियाघर के बब्बर शेर भरत की मौत मिर्गी के दौरे से हो गई थी। बीते मई में तेंदुआ मोना में कैंसर की पुष्टि हुई। उम्र अधिक होने से उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। बाद में उसने दम तोड़ दिया।
वहीं, पशु अस्पताल में रह रहे एक तेंदुए को ट्राइग्लिसराइड रक्त में पाए जाने वाले एक प्रकार का वसा (फैट) हो गया है। शरीर में सूजन होने के बाद चिकित्सकों ने इसके खून की जांच कराई, जिसमें इस बीमारी की पुष्टि हुई।
तेंदुए में थायराइड और सामान्य से कई गुना कोलेस्ट्राल बढ़ा मिला है। वहीं, मैलानी बाघिन की दोनों आंखे 90 फीसदी खराब हो चुकी हैं। उसकी ऑप्टिक नर्व में आई खराबी के सही नहीं होने की उम्मीद है। संवाद