दुधवा जंगल में विचरण करता तेंदुआ। स्त्रोत- वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी तेंदुओं के लिए मुसीबत बनती जा रही है। बाघों ने तेंदुओं के आशियानों को हथियाना शुरू कर दिया है।
बाघों से बचने के लिए जो तेंदुए घने जंगलों में न रहकर बाहरी किनारों, बागों और झाड़ियों में रहने लगे थे, उनके लिए अब यहां रहना भी मुश्किल हो गया है। क्योंकि आबादी बढ़ने पर अब बाघ जंगल के बाहरी किनारों तक अपना बसेरा बना रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। पहले हुई गणना के मुताबिक यहां 153 बाघ हैं। आबादी बढ़ने से धीरे-धीरे बाघ जंगल के किनारों से निकल कर गन्ने के खेतों तक में रहने लगे हैं। ऐसे में तेंदुओं के लिए रहने की समस्या पैदा हो रही है। ऐसे में वे आबादी की ओर रुख करने लगे हैं।
आए दिन तेंदुओं का आबादी में घुस जाना और उनके पालतू पशुओं पर हमला करना आम बात हो गई है। दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास मानव-वन्यजीव संघर्ष में तेंदुए भी एक कड़ी बन गए हैं।